सब्जी विक्रेता की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगा
राणा अजीत
नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने पुणे के एक निजी ट्रस्ट पर गोद लेने की आड़ में अपनी दो पोतियों को एक स्पेनी दंपति को बेचने का आरोप लगाने वाली एक सब्जी बेचने वाली महिला की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है।
लड़कियों की दादी किसाबाई तुलसीराम लोखंडे की याचिका पर न्यायाधीश आफताब आलम की खंडपीठ ने सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स एजेंसी (सीएआरए) से भी जवाब मांगा।
अपनी याचिका में लोखंडे ने कहा कि बच्चियों की देखभाल में असमर्थ होने के कारण उन्होंने सितम्बर 2004 में कराड के एक आब्जरवेशन होम को लड़कियों को सौंप दिया। लोखंडे ने आरोप लगाया कि निजी ट्रस्ट प्रीत मंदिर ने एक स्पेनिश दंपति को उनके पोतियों को क्रमश: पांच लाख रुपये और 25 लाख रुपये में बेच दिया।
मुंबई उच्च न्यायालय ने इस आधार पर लोखंडे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी थी कि उन्होंने स्वयं लड़कियों को आब्जरवेशन होम को सौंपा था।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक में लड़कियों को गोद देने के बारे में प्रकाशित विज्ञापन पर भी लोखंडे कोई प्रतिक्रिया करने में असफल रहीं।
लोखंडे की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में पेश वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता ने कहा कि उनकी मुवक्किल एक निरक्षर सब्जी विक्रेता है और न्यास का विज्ञापन आंखों में धूल झोंकने के लिए था।
दत्ता ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को नहीं देखा कि लड़कियों को केवल महाराष्ट्र भीतर किसी संस्था में देने की सहमति थी और उन्हें विदेशों में गोद देने की सहमति नहीं थी।
लोखंडे की याचिका के अनुसार शिक्षा का खर्च नहीं उठा पाने के कारण उन्होंने अपनी पोतियों को जुलाई 2004 में कराड के एक आब्जरवेशन होम में रखा। लड़कियों को सतारा बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया और बाद में प्रीत मंदिर में रखा गया। सीएआरए के उनको दिसम्बर 2004 में बेसहारा घोषित करने के बाद लड़कियों को स्पेनी दंपति को सौंप दिया गया।
बड़ी लड़की की उम्र अब करीब 20 वर्ष और छोटी लड़की किशोरावस्था में है। माता-पिता की मौत होने के बाद लड़कियों की देखभाल उनकी दादी करती थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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