तेलंगाना मसले पर विरोध जारी, पर नया इस्तीफा नहीं (राउंडअप)

जीएसी ने तेलंगाना क्षेत्र के सभी 119 विधायकों और 17 सांसदों से सोमवार शाम तक इस्तीफा देने को कहा था।

आंध्र प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल ई.एस.एल.नरसिम्हन ने विधायकों से राज्य में शांति बनाए रखने की अपील की जबकि तेलंगाना के समर्थन में कांग्रेस विधायकों ने उनके अभिभाषण के दौरान नारेबाजी की। दूसरी ओर उस्मानिया विश्वविद्यालय में दूसरे दिन भी तेलंगाना समर्थक छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पे हुईं।

इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष एन.किरणकुमार रेड्डी ने पृथक तेलंगाना के समर्थन में इस्तीफा सौंपने वाले 15 विधायकों में से 12 का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। न्यायाधीश बी. एन. श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति के कार्यक्षेत्र की घोषणा के खिलाफ रविवार को तेलंगाना क्षेत्र के 15 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपा था।

विधानसभा में सत्तारुढ़ कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में 'जय तेलंगाना' के नारे लगाए। वहीं तटीय आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के विधायकों ने एकीकृत आंध्र प्रदेश के पक्ष में नारेबाजी की। तेलंगाना क्षेत्र के तेदेपा विधायकों ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

राज्य में शांति व्यवस्था और विकास के लिए नरसिम्हन ने विधायकों से अपील की। उन्होंने कहा, "गत चार महीनों से राज्य कठिन दौर से गुजर रहा है जिससे कानून व्यवस्था, विकास की गति और राज्य की छवि प्रभावित हुई।" उन्होंने कहा कि जनता के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व राज्य सरकार पर है।

नरसिम्हन ने महात्मा गांधी के आदर्शो को हवाला देते हुए कहा, "गांधीजी ने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए संघर्ष किया था। "

उधर, विधानसभा रेड्डी ने जिन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया, उसमें तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के सभी 10 और मुख्य विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक-एक सदस्य शामिल हैं। उन्होंने सत्तारुढ़ कांग्रेस के दो और प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) के एक विधायक के इस्तीफे पर फैसला नहीं किया है।

उधर, हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय में तेलंगाना मुद्दे पर प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पे हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाई, जिसमें कई लोग घायल हुए। रविवार रात छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज और गोलीबारी के खिलाफ सोमवार को छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में रैली निकाली। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों पर पथराव भी किया।

पथराव के जवाब में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और लाठी चलाई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पथराव में कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हुए, जबकि पुलिस कार्रवाई में कुछ छात्र और मीडियाकर्मी घायल हुए।

मीडियाकर्मियों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। एक तेलुगू चैनल के रिपोर्टर ने कहा, "पुलिसकर्मियों ने मुझे निर्दयता से पीटा। वे मीडियाकर्मियों को अपशब्द कह रहे थे। वे कह रहे थे कि मीडिया के कारण ही छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं।"

आंध्र प्रदेश कामगार पत्रकार संघ ने पुलिस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है और संयुक्त पुलिस आयुक्त पी.एस.आर.अंजनयुलू के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। रविवार शाम विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा की जांच के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग की टीम वहां पहुंची। रविवार शाम हुई हिंसा में 30 से अधिक छात्र और छह मीडियाकर्मी घायल हुए थे।

इस बीच मुख्यमंत्री के. रोसैया ने अपने कार्यालय से बाहर पत्रकारों से मुलाकात कर घटना के लिए माफी मांगी, जबकि गृह मंत्री पी. सबिता इंद्रा रेड्डी ने कहा कि दोषी पाए जाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विश्वविद्यालय परिसर में तनाव उस समय फैल गया था जब छात्रों ने तेलंगाना के समर्थन में इस्तीफा देने वाले विधायकों के पक्ष में जुलूस निकाला था। विश्वविद्यालय परिसर में हिंसक घटनाओं के बाद मोआजाम जाही बाजार में भी तनाव फैल गया है। पुलिस ने बशीरबाग इलाके में स्थित निजाम कॉलेज का द्वार भी बंद कर दिया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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