इंडियन मुजाहिदीन का 'महत्वपूर्ण' ठिकाना था पुणे
मामले की जांच कर रहा आतंकवाद निरोधक दस्ता(एटीएस) सीसीटीवी कैमरे के उस फुटेज की गहराई से जांच कर रहा है, जिसमें दो संदिग्ध व्यक्तियों को जर्मन बेकरी में जाते हुए दिखाया गया है, जहां बम रखा गया था।
पिछली आतंकवादी गतिविधियों में आईएम के गिरफ्तार हुए सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही है, जिनमें दो फरवरी को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से गिरफ्तार हुए शहजाद अहमद और पप्पू भी शामिल है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आईएम के सदस्यों को पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रशिक्षण दिया जाता है।
माना जाता है कि 9/11 जैसे हमले के लिए शहजाद को पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया था।
पहचान छुपाने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि शुरुआती जांच से लग रहा है कि धमाके के पीछे आईएम का ही हाथ है।
अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि पुणे आईएम का एक महत्वपूर्ण ठिकाना रहा है।
साल 2007 और 2008 में जयपुर, बेंगलुरु, अहमदाबाद और नई दिल्ली में हुए बम धमाकों के बाद यह संगठन चर्चा में आया था। इसके संबंध पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से है।
इस संगठन के बड़े नेता समझे जाने वाले इकबाल और रियाज भटकल नामक दो भाई इस समय कराची में लश्कर-ए-तैय्यबा के शिविरों में छिपे हैं। आतंकी माड्यूल गठित करने के लिए ये दोनों 2006 में कुछ समय पुणे में थे।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, भटकल बंधुओं के अलावा इस संगठन के दो प्रमुख नेता मुफ्ती सूफियान और रसूल पारती भी कराची में ही हैं।
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, घटनास्थल से जो सबूत जुटाए गए उसमें बम बनाने के लिए प्रयोग हुआ आरडीएक्स और अमोनियम नाइट्रेट भी मिला है। इन रसायनों का प्रयोग करके विस्फोट करने का तरीका आईएम ही अपनाता रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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