पाकिस्तान में जरदारी के फैसले के खिलाफ वकीलों की हड़ताल

एक प्रमुख वकील निहाल हाशमी ने एडनक्रोनोस इंटरनेशनल (एकेआई) को बताया, "राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने न्यायपालिका में विभाजन की कोशिश की है लेकिन उनका षडयंत्र कामयाब नहीं हुआ है।"

वकीलों ने अदालत की कार्यवाहियों का बहिष्कार किया। उन्होंने इस्लामाबाद, कराची और लाहौर सहित विभिन्न शहरों में सड़कों पर निकलकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और सत्तारूढ़ दल के झंडे जलाए। वकीलों के इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

पाकिस्तान की कम से कम 66 बार एसोसिएशनों ने सोमवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें न्यायपालिका में नियुक्तियों से संबंधित राष्ट्रपति के 13 फरवरी के फैसले को गैरकानूनी बताया गया है और मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास ले जाने की बात कही गई है।

जज से पदोन्नत कर लाहौर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए साकिब निसार और सुप्रीम कोर्ट के एक जज के लिए पदोन्न किए गए लाहौर के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश ने चौधरी की सहमति के बिना अपनी पदोन्नति स्वीकार करने से मना कर दिया है।

पूर्व प्रधानमंत्री व पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के अध्यक्ष नवाज शरीफ ने रविवार को इस्लामाबाद में एक मीडिया सम्मेलन आयोजित कर जरदारी को वर्तमान समय में लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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