आठ माह तक यांत्रिक हृदय पंप पर जिंदा रहा किशोर
अस्थायी आघात के बाद सैंटिगो को दक्षिण टेक्सास से टेक्सास चिल्ड्रेंस हार्ट सेंटर (टीसीएचसी) भेज दिया गया था। यहां परीक्षण में पता चला कि उसके हृदय का आकार सामान्य से दोगुना हो गया है, जिससे यह ठीक से रक्त को पंप नहीं कर पाता है।
पिछले साल मई में फ्रैंक के हृदय में यंत्र लगाने वाले और हाल में हृदय प्रत्यारोपित करने वाले टीसीएचसी के बाल हृदय सर्जन डेविड एल.डी. मोराल्स कहते हैं, "सैंटिगो की सर्जरी वाकई में बहुत अच्छी रही। यंत्र से उसके शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ और हम उसे अस्पताल से छुट्टी दे सके। इसलिए वह प्रत्यारोपण तक अन्य किशोरों की तरह सामान्य जिंदगी व्यतीत कर सका।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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