भारत के सामरिक हितों का नुकसान नहीं होने देगा श्रीलंका : राजदूत
उन्होंने कहा कि तमिल विद्रोहियों के सफाए के बाद स्थायी शांति के लिए ऐतिहासिक अवसर प्राप्त हुआ।
कारियावासम ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "चीन एक पुराना मित्र है लेकिन भारत सबसे पुराना मित्र है। भारत के साथ हमारे रिश्ते दो हजार साल पुराने हैं। चीन के साथ हमारे राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते भारत की कीमत पर नहीं होंगे।"
कोलंबो में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव पर भारत की चिंताओं के बारे में जब उनसे पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "भारत के सामरिक हितों को नुकसान पहुंचाने के किसी तंत्र या प्रयास में उनका देश पक्ष नहीं बनेगा। भारत के सामरिक हितों का नुकसान पहुंचाना खुद के हितों को नुकसान पहुंचाने के बराबर है।"
आंतरिक युद्ध के बाद पुनर्निमाण के लिए चीन में कोलंबो को 35 करोड़ डॉलर की सहायता देने के अलावा वहां पर करीब छह अरब डॉलर की विकास संबंधी परियोजनाओं में भागीदार की भूमिका निभा रहा है। वहीं भारत ने तीन लाख से ज्यादा लोगों के पुनर्वास के लिए 500 करोड़ रुपये (10 लाख डॉलर) की सहायत दी है। नई दिल्ली भी श्रीलंका के उत्तरी हिस्से के पुनर्निमाणा संबंधी परियोजनाओं में भागीदार है।
उन्होंने कहा, "हमें मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर बातचीत से काफी उम्मीदें हैं। "
श्रीलंका पहला ऐसा देश है, जिसके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौता किया था। इससे द्विपक्षीय व्यापार के तीन अरब डॉलर को पार कर जाने का अनुमान है।
कारियावासम ने कहा, "हमें उम्मीद है कि अगले 10 सालों में द्विपक्षीय व्यापार 15 से 20 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।"
युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निमाण में भारत की भूमिका पर उन्होंने कहा कि भारत ऐसी कई परियोजनाओं में काम कर रहा है। इसमें उत्तरी श्रीलंका में रेलवे लाइन और जाफना प्रायद्वीप में पलाली हवाई अड्डा और कानकेसनथुराय बंदरगाह शामिल है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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