पदोन्नत नहीं किए जाने से दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आहत

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह ने गुरुवार को अंतत: अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत नहीं किए जाने से वह आहत हुए।

न्यायाधीश के रूप में 17 वर्षो के कार्यकाल के बाद 13 फरवरी को अवकाश ग्रहण करने जा रहे शाह ने अपने सहयोगी न्यायाधीशों और न्यायालय के अन्य सदस्यों को अलविदा कहा और बताया, "मैं यह ढोंग नहीं कर सकता कि मुझे चोट नहीं लगी। मैंने हमेशा आहत महसूस किया।"

अपने अंतिम कार्य दिवस पर आईएएनएस को दिए गए साक्षात्कार में शाह (62) ने कहा, "मेरा मानना है कि लोगों को यह न्याय करना है कि मुझे पदोन्नत किया जाना चाहिए था या नहीं।"

कई प्रमुख न्यायाधीशों ने सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए उनके नाम को आगे बढ़ाया लेकिन निर्णायक मंडल ने ऐसा नहीं किया। इस फैसले की काफी आलोचना हुई। ऐसा करने वालों में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व प्रधान न्यायाधीश जे.एस.वर्मा भी थे, जिन्होंने उनको देश के बेहतरीन न्यायाधीशों में से एक बताया था।

शाह ने दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से यौन संबंधों को गैर आपराधिक कृत्य ठहराने के ऐतिहासिक फैसले सहित कई प्रमुख निर्णय दिए। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय को सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाने संबंधी फैसला भी इनमें से एक है।

शाह के कार्यकाल में दिल्ली उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति की घोषणा की और उसे आधिकारिक वेबसाइट पर रखा।

जब उनसे न्यायापालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "न्यायपालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त है लेकिन ऊपरी न्यायालयों में यह न्यूनतम है। यह वास्तविकता है और हम इसे नकार नहीं सकते।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+