अमेरिका ने की ईरान पर प्रतिबंध की पेशकश

एक पश्चिमी कूटनीतिज्ञ ने इस बात की पुष्टि की है कि अमरीका ने अपने यूरोपीय सहयोगी देशों को ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बारे में एक दस्तावेज़ दिया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मांगों को ना मानने की सज़ा के तौर पर पहले भी तीन बार ईरान पर प्रतिबंध लगाए गए हैं.
इस दस्तावेज़ को प्रतिबंधों के चौथे दौर के पहले चरण के तौर पर देखा जा रहा है. पश्चिमी कूटनीतिज्ञ के मुताबिक़ अमरीकी दस्तावेज़ परमाणु उद्योग से जुड़ी यात्राओं और संपत्ति जुटाने पर प्रतिबंध तो लगाने की बात करता ही है साथ ही ईरान के सेंट्रल बैंक पर प्रतिबंध लगाने जैसे वित्तीय क़दमों की बात भी करता है.
आम सहमति की ज़रूरत
मुख्य तौर पर दस्तावेज़ में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर काम करने वाले ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ सदस्यों को निशाना बनाया गया है. हालांकि इस दस्तावेज़ में सुझाए गए क़दमों पर अमल करने के लिए अमरीका को यूरोपीय देशों के अलावा रूस और चीन की सहमति भी लेनी होगी. चीन जहां प्रतिबंधों के सख़्त ख़िलाफ़ है वहीं रूस ने भी इस मामले में सहमति नहीं व्यक्त की है.
लेकिन इन सबसे अहम ये है कि ईरान ने अचानक परमाणु ईंधन पर अपनी नीति में बदलाव लाने की बात कही है. इसने दुनिया में असमंजस की स्थिति बना दी है.
ईरान ने बदली नीति
फ्रांस के विदेश मंत्री बर्नर्ड कोचनर ने कहा, "ईरान के राष्ट्रपति के बयान को मैंने अखबार में पढ़ा. मुझे नहीं लगा कि आईएईए को ईरान ने आधिकारिक तौर पर कुछ कहा है. मेरे ख़्याल से ये सिर्फ़ बात को टालने के लिए कहा जा रहा है."
ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने बुधवार को कहा था कि उनकी सरकार कम संवर्धित परमाणु ईंधन यूरेनियम को ज़्यादा संवर्धित करने के लिए विदेश भेजने के संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्ताव को मानने के लिए तैयार है. लेकिन ईरान ने ये बात औपचारिक रूप से किसी देश से नहीं कही. अहमदीनेजाद के बयान के बाद अमरीका ने कहा है कि ईरान को तुरंत इसकी जानकारी संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को देनी चाहिए.












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