देश प्रेम और वर्दी बनी छोटे कस्बों की लड़कियों के लिए प्रेरणा
अल्केश शर्मा
पंचकुला, 3 फरवरी (आईएएनएस)। वे छोटे कस्बों की लड़कियां हैं, लेकिन उनके ख्वाब बड़े हैं। वे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की पहली महिला टुकड़ी के रूप में जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय सीमा और अन्य संवेदनशील इलाकों की रखवाली करेंगी।
देशप्रेम के जज्बे और वर्दी के प्यार ने इन लड़कियों को अर्ध सैनिक बल में भर्ती होने की प्रेरणा दी।
उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली मीतू यादव ने आईएएनएस को बताया, "मैंने हिंदी में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है, लेकिन किसी अन्य नौकरी की बजाय मैंने अपने परिवार की परंपरा के अनुसार आईटीबीपी को चुना। मेरे दादा जी आईटीबीपी से सेवानिवृत्त हुए हैं और इस समय मेरे पिता जी और चाचा भी इसी बल में काम कर रहे हैं।"
मीतू कहती हैं, "मुझे वर्दी से बहुत प्यार है। यही मुझे देश सेवा की प्रेरणा देती है।"
यहां से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित भानू प्रशिक्षण केंद्र में पिछले सप्ताह आईटीबीपी की महिला टुकड़ी की अंतिम पासिंग आउट परेड में 209 लड़कियां शामिल हुईं। केंद्रीय गृह मंत्री ने परेड की सलामी ली। वह बल में नियुक्त हुई अनीता के पिता भवानी सिंह को बधाई देने उनके घर भी गए।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले भवानी सिंह कहते हैं, "मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब पिता हूं क्योंकि मेरी बेटी की वजह से मुझे गृह मंत्री से मिलने का मौका मिला। चिदंबरम ने मेरे परिवार के बारे में जाना। वह बहुत भले और जमीन से जुड़े हुए इंसान लगे।"
उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रहने वाली पूजा बिष्ट कहती हैं, "मैं उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं, जब मुझे सीमा पर निगरानी का मौका मिलेगा। "
उत्तराखंड की ही ममता जोशी ने आईएएनएस से कहा, "हम पांच बहनें हैं लेकिन आईटीबीपी में नियुक्ति के बाद मैं अपनी चारों बहनों के लिए भाई की तरह हो गई हूं। आईटीबीपी में आने की बात पर कुछ लोगों ने मुझे हतोत्साहित भी किया लेकिन परिवारवालों के सहयोग से मैं यहां तक पहुंची।"
इस महिला टुकड़ी में शामिल 209 लड़कियों में सबसे ज्यादा 44 उत्तराखंड की हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार का नंबर है, जहां से क्रमश: 36 और 22 लड़कियों की निुयक्ति इस बल में हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सíवस।
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