परमाणु हथियारों की भूमिका घटाने में भारत के सहयोग की संभावना : अमेरिका
वाशिंगटन, 3 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका का मानना है कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से बार-बार इंकार करने के बावजूद अप्रैल में वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेने के भारत के फैसले से जाहिर होता है कि वह दुनिया की सुरक्षा में परमाणु हथियारों की भूमिका घटाने के लिए कार्य करेगा।
अमेरिका के नेशनल इंटेलीजेंस के निदेशक डेनिस ब्लेयर ने मंगलवार को सीनेट की इंटेलीजेंस समिति के समक्ष वार्षिक खतरा आकलन रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि यह संकेत जी-20 और कोपेनहेगन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में देखे गए रुख की निरंतरता का गवाह है।
उन्होंने कहा कि जी-20 और कोपेनहेगन में भारत ने कई वार्ताओं के परिणाम हासिल करने में मदद की। अप्रैल 2010 में वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सेदारी का फैसला इसी रुख के जारी रहने का संकेत है।
ब्लेयर के अनुसार परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर से बार-बार इंकार के बावजूद वैश्विक सुरक्षा में परमाणु हथियारों के महत्व को घटाने के दीर्घकालिक लक्ष्य में भारत के सहयोग देने की संभावना है।
सेंट्रल इंटलीजेंस एजेंसी (सीआईए) और संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) सहित 16 खुफिया एजेंसियों के खतरों के आकलन को पेश करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख साझेदार के तौर पर भारत में वर्ष 2010 में मजबूत वृद्धि हासिल करने की क्षमता है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष वर्ष की छमाही में भारत में कुल निवेश 18 अरब डॉलर होने का उल्लेख करते हुए ब्लेयर ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत निवेश और आर्थिक संभावनाओं का आकर्षक स्थल बना हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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