संघ के बाद भाजपा और केंद्र ने भी कहा, 'मुंबई सबकी' (राउंडअप)
भाजपा ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उस रुख का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि भाषा, क्षेत्र या धर्म के नाम पर पार्टी किसी भी प्रकार के भेदभाव को स्वीकार नहीं करेगी। संघ ने कहा था कि उसने अपने स्वयंसेवकों को हिंदी भाषियों व उत्तर भारतीयों की रक्षा के लिए आगे आने का निर्देश दिया है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी मुख्यालय में सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "संविधान की धारा 19 (1) (ई) के तहत सभी भारतीयों को देश में कहीं भी बसने और रोजगार करने का अधिकार है और यही हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूती प्रदान करता है। जनसंघ के जमाने से ही हम इस सिद्धांत पर विश्वास करते आए हैं। इसी सिद्धांत के आधार पर हमने जम्मू एवं कश्मीर में धारा 370 का हमेशा विरोध किया है।"
उन्होंने कहा, "भाजपा ने भाषाई, क्षेत्रीय और धार्मिक पहचान को सच्चाई के रूप में स्वीकार किया है। देश की अनेकता में एकता को तभी मजबूती मिलती है जब इन पहचानों का मिश्रण हो और भारतीयता की एक राष्ट्रीय पहचान उभर कर सामने आए। इसमें न तो विवाद है और न हो सकता है।"
गडकरी ने कहा, "देश का नागरिक किसी भी भाषा, क्षेत्र और धर्म का हो लेकिन इससे भारतीयता की उसकी पहचान कभी भी धूमिल नहीं हुई। भाजपा कभी भी उस सिद्धांत को स्वीकार नहीं करेगी जहां भारतीयता तथा भाषा, क्षेत्र और धर्म के बीच भेद हो।"
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में भाषा और क्षेत्रीयता के के नाम पर हिंदी भाषी और उत्तर भारतीयों पर हो रहे हमलों की प्रतिक्रिया में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी स्पष्ट कर चुके हैं कि इस प्रकार का संकीर्ण क्षेत्रवाद संघ को स्वीकार नहीं है।
उधर, संघ के उत्तर भारतीयों के समर्थन में आने से बौखलाई शिव सेना ने संघ को मुंबई से जुड़े मामलों से दूर रहने की नसीहत दी है और कहा है कि पार्टी को संघ से सीख नहीं चाहिए।
शिव सेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पत्रकारों से चर्चा में कहा, "हमें संघ से सीख नहीं चाहिए। यह उनके हित में होगा कि वे इस मामले में न पड़े। इस मुद्दे पर हमारा रुख कोई नया नहीं है। मुंबई मराठियों की है।"
उन्होंने कहा कि संघ को राम माधव द्वारा उठाए गए बिन्दुओं पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। ठाकरे ने कहा, "यह संघ का आधिकारिक रुख है या राम माधव के निजी विचार हैं, स्पष्ट होना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि उत्तर भारतीयों के मुद्दे पर शिव सेना की आलोचना करने से बेहतर होगा कि संघ असम में उत्तर भारतीयों की चिंता करे या वह दक्षिण भारत के राज्यों में जाए और वहां के लोगों को हिंदी सिखाए।
शिव सेना के 'मुंबई मराठियों की' नारे की आलोचना करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने भी शिव सेना को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी घातक विचार को खारिज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुंबई पूरे देशवासियों की है।
चिदम्बरम ने पत्रकारों से चर्चा में कहा, "हम शिव सेना के इस सिद्धांत को खारिज करते हैं। मुंबई पूरे देश की है और सभी देशवासी वहां रहने और रोजगार करने को स्वतंत्र हैं।"
उन्होंने कहा, "नीतिगत तौर पर हम शिव सेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के इस सिद्धांत को हम खारिज करते हैं। यह सिद्धांत घातक है और इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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