मुंबई सभी की, खिलाड़ियों की सुरक्षा की गारंटी मेरी : चिदम्बरम (राउंडअप)

उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के गृह मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने यदि वह पाकिस्तान जाते हैं तो पाक नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता भी हो सकती है।

शिव सेना के 'मुंबई मराठियों की' नारे की आलोचना करते हुए चिदम्बरम ने यहां पत्रकारों से चर्चा में कहा, "हम शिव सेना के इस सिद्धांत को खारिज करते हैं। मुंबई पूरे देश की है और सभी देशवासी वहां रहने और रोजगार करने के लिए स्वतंत्र हैं।" चिदम्बरम अपने मंत्रालय का मासिक रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने के बाद पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने रविवार को अपने स्वयंसेवकों को हिंदी भाषियों व उत्तर भारतीयों की रक्षा के लिए आगे आने का निर्देश दिया था। संघ के इस निर्देश से बौखलाई शिव सेना ने संघ को मुंबई से जुड़े मामलों से दूर रहने की नसीहत दी थी और कहा था कि पार्टी को संघ से सीख नहीं चाहिए।

चिदंबरम ने यह भी कहा कि वह शिव सेना की धमकियों से घबराई आस्ट्रेलिया और पाकिस्तानी टीमों की 'पूरी सुरक्षा' की गारंटी देते हैं।

उन्होंने कहा, "आस्ट्रेलियाई और पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भारत आने दीजिए। उन्हें मुंबई में खेलने दीजिए। मैं उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी लेता हूं।"

चिदंबरम का यह बयान शिव सेना के उस बयान के बाद आया, जिसमें उसने भारतीयों पर हो रहे हमलों के मद्देनजर आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को इंडियन प्रीमियर लीग में नहीं खेलने देने की धमकी दी थी। शिव सेना ने मुंबई पर हुए आतंकी हमलों और भारत विरोधी गतिविधियों के कारण पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भी भारत में नहीं खेलने देने संबंधी धमकी जारी की थी।

पाकिस्तान के प्रस्तावित दौरे के बारे में संवाददाताओं के प्रश्नों के जवाब में चिदम्बरम ने कहा, "मेरा अनुमान है कि यदि मैं पाकिस्तान गया तो अवसर मिलने पर द्विपक्षीय वार्ता करूंगा। परंतु याद रहे दक्षेस एक बहुपक्षीय मंच है।"

दक्षेस के गृह मंत्रियों का सम्मेलन इस्लामाबाद में 20 फरवरी को आयोजित होगा। सूत्रों के अनुसार चिदम्बरम इसमें हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जा सकते हैं।

मुंबई पर वर्ष 2008 के आतंकवादी हमले के बाद से कोई भी भारतीय मंत्री पाकिस्तान दौरे पर नहीं गया। तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी मई 2008 में पाकिस्तान दौरे पर गए थे।

आतंरिक सुरक्षा मंत्रालय के गठन के संबंध में उनके द्वारा दिसम्बर में प्रस्तुत किए गए विचार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाया गया है।

चिदम्बरम ने कहा कि उन्होंने दिसम्बर से मंत्रालय में एक अंतरिम व्यवस्था बनाने और जो मामले सुरक्षा से संबंधित नहीं थे, उनको अपने दो कनिष्ठ मंत्रियों एम.रामचंद्रन और अजय माकन को सौंपने का फैसला किया था। इससे गृह मंत्री को आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों जैसे पूवरेत्तर तथा जम्मू एवं कश्मीर में उग्रवाद तथा मध्य भारत में नक्सली समस्या पर ध्यान केंद्रित करने की छूट मिली।

गृह मंत्री ने कहा, "यह गृह मंत्रालय के पुनर्गठन का मामला है। इसका निर्णय प्रधानमंत्री करेंगे। इस दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। परंतु मैंने सुरक्षा से असंबद्ध सभी कार्य दोनों राज्य मंत्रियों को सौंपने का फैसला किया है।"

उन्होंने कहा कि इस फैसले से उनको अपना समय आतंरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर लगाने में मदद मिलेगी।

चिदम्बरम ने स्वीकार किया कि नक्सल प्रभावित राज्यों में बढ़ती नक्सली हिंसा की घटनाएं और इसमें हो रही मौतें केंद्र सरकार के लिए चिंता का सबब बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा, "नक्सली हिंसा सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। वर्ष 2009 में नक्सली घटनाओं से हुई मौतों से ये संकेत मिले हैं।"

गत वर्ष नक्सली हिंसा की घटनाओं में 1125 लोगों की मौत हुई थी। इसमें 591 नागरिक, 317 सुरक्षाकर्मी और 217 नक्सली हैं।

चिदम्बरम ने यह भी कहा कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के प्रमुख वी. प्रभाकरणन की मौत के संदर्भ में श्रीलंका की सरकार ने भारत के समक्ष औपचारिक तौर पर पुष्टि कर दी है। वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का प्रमुख आरोपी था।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो को औपचारिक दस्तावेज श्रीलंका की ओर से सौंपे गए हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) की भूमिका तय होने संबंधी एक सवाल पर गृह मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा, "नवनियुक्त एनएसए शिवशंकर मेनन की भूमिका प्रधानमंत्री तय करेंगे। इस संबंध में मेरी प्रधानमंत्री से अभी तक कोई बात नहीं हुई है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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