तीव्र विकास के लिए केंद्र और राज्यों में बेहतर हो सहयोग : प्रधानमंत्री (लीड-1)
राज्यों के मुख्य सचिवों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "कानून का शासन सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके अलावा तीव्र आर्थिक विकास के लिए शांति और सांप्रदायिक सौहार्द का वातावरण भी पहली शर्त है।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और चरमपंथ से कड़ाई लेकिन संवेदनशीलता के साथ निपटने की जरूरत है क्योंकि तेज आर्थिक विकास के लिए ऐसा किया जाना आवश्यक है। बकौल प्रधानमंत्री, "कानून और व्यवस्था तंत्र को सुरक्षा के प्रमुख खतरों और उनके प्रभावों के बारे में संवेदनशील बनना होगा। आतंकवाद, उग्रवाद और चरमपंथ से कड़ाई मगर संवेदनशीलता से निपटने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "राज्यों के बीच बेहतर संबंधों से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। इस संदर्भ में कुछ समस्याएं हैं, जिनके लिए न सिर्फ प्रभावित राज्यों बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग की आवश्यकता है।"
उन्होंने कहा कि समस्याओं और संकटों से निबटने के लिए प्रशासनिक तंत्र में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को अच्छी जानकारी, अच्छा प्रशिक्षण और बेहतर उपकरणों से युक्त होना होगा ताकि वह अपने सामने आने वाले कार्यो को बेहतर ढंग से सुलझा सके।
प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि उत्पादों की उपलब्धता तथा कीमतों पर नियंत्रण दोनों अभी भी एक चुनौती है। साथ ही उन्होंने कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्य सरकारों से कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर बहुत अधिक ध्यान देने का आग्रह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रमुख खाद्यान्नों की उपज में सुधार की काफी अधिक संभावना है। सिंह ने कहा, "हमारी कृषि उत्पादकता दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले कम है।"
उन्होंने कहा कि यदि तेज आर्थिक वृद्धि से गरीबों और वंचितों, हमारे किसानों और कामगारों, हमारे बच्चों, छात्रों और महिलाओं की भलाई नहीं होती तो उसका कोई अर्थ नहीं है। विकास प्रक्रिया का लाभ देश के हर हिस्से तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नौकरशाही केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं को सही और विकेंद्रित तरीके से लागू किया जाना सुनिश्चित कर सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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