फिलहाल तेल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं (लीड-1)
देवड़ा ने कहा कि तेल कंपनियों के लिए अधिक मुआवजे हेतु वह केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करेंगे। सरकारी स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियां ईंधन सब्सिडी के कारण घाटे में चल रही हैं।
देवड़ा ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हम कोशिश कर रहे हैं कि वाहनों में इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन की कीमत में वृद्धि न हो।" देवड़ा ने कहा कि तेल कीमतों में वृद्धि से संबंधित कोई भी निर्णय, कीमत निर्धारण नीति के लिए गठित की गई किरीट पारिख समिति की रिपोर्ट जमा किए जाने के बाद लिया जाएगा। समिति इस सप्ताह अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है।
देवड़ा ने कहा, "आप जानते हैं कि सरकार कीमत में वृद्धि को लेकर बहुत चिंतित है। यदि डीजल की कीमत में दो रुपये की वृद्धि होती है तो उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।"
देवड़ा ने कहा कि मुखर्जी के साथ मंगलवार को होने वाली उनकी मुलाकात के दौरान तेल कंपनियों के सामने खड़ी समस्याओं पर चर्चा होगी। तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और खाना पकाने की गैस में दी जाने वाली सब्सिडी के कारण घाटे का सामना कर रही हैं।
पिछली तीन तिमाहियों के दौरान तेल कंपनियों को 29,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इसमें ओएनजीसी और ऑयल इंडिया का पेट्रोल और डीजल से हुआ 8,000 करोड़ रुपये का घाटा शामिल है। सरकार ने फिलहाल केरोसिन और एलपीजी से हुए घाटे के लिए मात्र 12,000 करोड़ रुपये नकदी का वादा किया है।
लेकिन यह राशि अप्रैल से दिसंबर 2009 के बीच हुए घाटे से 9,000 करोड़ रुपये कम है।
ज्ञात हो कि परिवहन ईंधन की कीमतों के निर्धारण की व्यवस्था सहित तेल क्षेत्र में सुधार पर सिफारिशें देने के लिए किरीट पारिख समिति का गठन किया गया था। इस समिति की रिपोर्ट की लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय पूरे घाटे का भार उठाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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