आशावाद ने देशवासियों को नतीजों के लिए अधीर भी बनाया : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा, "हालांकि हमारे भविष्य की संभावनाओं को लेकर अप्रत्याशित उत्साह है, वहीं नई चुनौैतियां भी हैं जिनका एक प्रशासक के नाते हम सामना कर रहे हैं। आज प्रशासन बहुत जटिल हो गया है।"
राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में सिंह ने कहा, "जिस गति से हम नतीजें देते हैं, बढ़ते आशावाद ने लोगों को उसके प्रति अधीर बना दिया है। लोग आज सरकार में किसी भी स्तर पर किसी भी प्रकार के उदासीनता, सुस्ती और भ्रष्टाचार पर पहले से कहीं अधिक नाराज होते हैं।"
उन्होंने कहा, "सभी ओर से विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया की अधिक जवाबदेही का शोर है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्यों के बीच बेहतर संचार और समन्वय का अर्थ यह भी है कि एक राज्य में जो होता है उसका असर दूसरे राज्य पर होता है।
उन्होंने कहा, "इस सबके लिए आवश्यक है कि समस्याओं और संकट के समय हमारी प्रतिक्रिया अधिक रचनात्मक और कल्पनाशील हो। इसके लिए नौकरशाही को अपने सामने दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अधिक जानकार, प्रशिक्षित तथा लैस होना चाहिए और ऐसा केवल तभी हो सकता है जब सरकारी तंत्र वर्तमान और भविष्य की मांगों के लिए तीव्र, नवोन्मेषी और लचीला हो।"
अन्य देशों की तुलना में भारत के अधिक बेहतर ढंग से वैश्विक आर्थिक मंदी का सामना करने पर राहत जताते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि समग्र विकास सरकारी विकास के केंद्र में बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि यदि तेज आर्थिक वृद्धि से गरीबों और वंचितों, हमारे किसानों और कामगारों, हमारे बच्चों, छात्रों और महिलाओं की भलाई नहीं होती तो उसका कोई अर्थ नहीं है। विकास प्रक्रिया का लाभ देश के हर हिस्से तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नौकरशाही केंद्र और राज्य सरकारों के कई कल्याणकारी कार्यो को सही और विकेंद्रित तरीके से लागू किया जाना सुनिश्चित कर सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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