खाद्य सुरक्षा, उत्पादकता भारत के लिए अभी भी बड़ी चिंताएं : प्रधानमंत्री
राज्यों के मुख्य सचिवों के पहले वार्षिक सम्मेलन में सोमवार को प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले दो वर्षो के हमारे अनुभव से खाद्य सुरक्षा और कीमतों को नियंत्रण में रखने का महत्व सामने आया है।"
जमीनी हकीकत के बारे में बिना किसी लाग-लपेट के सिंह ने कहा, "कुछ समय पहले तक खाद्य सुरक्षा और खाद्यान्नों की उपलब्धता के बारे में गलत धारणा थी। इसी प्रकार कई लोग मानते थे कि हम कीमतों पर नियंत्रण रखने में सक्षम हैं।"
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर बहुत अधिक ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रमुख खाद्यान्नों की उपज में सुधार की काफी अधिक संभावना है और उम्मीद जताई कि इसे हासिल करने के बहुत बड़े प्रयास दिखाई देंगे।
सिंह ने कहा, "हमारी कृषि उत्पादकता दुनिया के सबसे बेहतर उत्पादन की तुलना में कम है।"
अन्य देशों की तुलना में भारत के अधिक बेहतर ढंग से वैश्विक आर्थिक मंदी का सामना करने पर राहत जताते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि समग्र विकास सरकारी विकास के केंद्र में बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि यदि तेज आर्थिक वृद्धि से गरीबों और वंचितों, हमारे किसानों और कामगारों, हमारे बच्चों, छात्रों और महिलाओं की भलाई नहीं होती तो उसका कोई अर्थ नहीं है। विकास प्रक्रिया का लाभ देश के हर हिस्से तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नौकरशाही केंद्र और राज्य सरकारों के कई कल्याणकारी कार्यो को सही और विकेंद्रित तरीके से लागू किया जाना सुनिश्चित कर सकती है।
देश में खराब आधारभूत ढांचे पर चिंता जाहिर करते हुए सिंह ने कहा कि पिछड़े हुए राज्यों को सभी बाधाओं को दूर करने के लिए अधिक प्रयास करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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