प्रधान न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय के विभाजन के पक्ष में नहीं
नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। देश के प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि वह विधि आयोग की सिफारिश के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय की चार क्षेत्रीय खंडपीठों की स्थापना के पक्ष में नहीं हैं।
आर.के.जैन स्मारक व्याख्यान में प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "मैं सर्वोच्च न्यायालय के विभाजन के पक्ष में नहीं हूं। मेरा मानना है कि भारत के किसी भी अन्य हिस्से में सर्वोच्च न्यायालय नहीं हो सकता। यह देश का सर्वोच्च न्यायालय है और राजधानी में है।"
उन्होंने कहा, "यह अंतिम न्यायालय है और हमें सर्वोच्च न्यायालय की समग्रता कायम रखनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के पुनर्गठन में कुछ गलत नहीं है लेकिन इसका विघटन नहीं किया जा सकता।"
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में मामलों को दायर करने की दर अभूतपूर्व तरीके से बढ़ी है। विभिन्न खंडपीठों के समक्ष 50,000 से अधिक मामले लंबित पड़े हैं।
लंबित मामलों को निपटाने के संभावित तरीके के रूप में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की पीठें स्थापित करने और केवल संवैधानिक मुद्दों के परीक्षण के लिए दिल्ली में एक संघीय अदालत की स्थापना के विधि आयोग की सिफारिश का केंद्र सरकार परीक्षण कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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