कुंभ के मेले में हाथी और घोड़ों पर निकली साधुओं की शाही सवारी
हरिद्वार, 30 जनवरी (आईएएनएस)। कुंभ मेले में शनिवार को जब नागा व अन्य साधुओं की शाही सवारी (पेशवाई) निकली तो यहां का नजारा कुछ और ही था। कोई सजे-धजे हाथियों पर सवार था तो कोई घोड़ों से खींचे जाने वाले रथों पर। हाथों में तबले, झाल, मंजीरे लिए अन्य साधु भी अपनी धुन में साथ-साथ चले जा रहे थे।
शनिवार दोपहर आरंभ हुए इस कार्यक्रम में नागा सहित जूना अखाड़े और अग्नि अखाड़े के हजारों साधु सम्मिलित हुए।
जूना अखाड़े के सदस्य गिरीराज कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "अखाड़ों का यह शाही कार्यक्रम कुंभ का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। जुलूस के रूप में प्रचलित इस कार्यक्रम के जरिए विभिन्न अखाड़ों के साधुओं का कुंभ मेले में आगमन होता है।"
जुलूस के दर्शन को सड़क के दोनों ओर लोग भारी संख्या में इकट्ठा थे। लोगों में नागा साधुओं का आशीर्वाद लेने की होड़ सी मची थी। जुलूस के दौरान पूरे रास्ते स्थानीय लोग साधुओं पर फूल बरसाते रहे। यह देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आसमान से फूलों की वर्षा हो रही हो।
हरिद्वार के छावनी क्षेत्र से मेला स्थल तक इस जुलूस ने 20 किलोमीटर तक का सफर तय किया। जुलूस में पांच हाथी, एक ऊंट, 20 कार, ट्रॉली-ट्रैक्टर सहित आठ बैंड थे।
मेले के प्रमुख अधिकारी आनंद वर्धन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "पेशवाई शाही सवारी को लोग अक्सर शाही स्नान से जोड़कर देखते हैं, जबकि इसका शाही स्नान से कुछ भी लेना देना नहीं है।"
बहरहाल, जुलूस के मद्देनजर सुरक्षा की व्यापक तैयारियां की गई थीं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "400 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में लगाया गया है। इसमें स्थानीय खुफिया इकाई के अलावा प्रांतीय सशस्त्र पुलिस (पीएसी) की दो और रेपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की एक टुकड़ी शामिल थी।"
उल्लेखनीय है कि गत 14 जनवरी को महाकुंभ मेले की शुरुआत हुई थी। यह मेला 28 अप्रैल तक चलेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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