राजपथ पर जयपुर के जंतर-मंतर ने किया 21 झांकियों का नेतृत्व
गणतंत्र दिवस परेड में निकली तेरह राज्यों एवं आठ केन्द्रीय मंत्रालयों की झांकियों में सबसे आगे राजस्थान की झांकी जयपुर के जंतर-मंतर का जादू चला। राजस्थान की झांकी के पीछे, मणिपुर, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मेघालय, त्रिपुरा, जम्मू एवं कश्मीर, गोवा, छत्तीसगढ़, केरल, मिजोरम और उत्तराखंड राज्यों की झांकियां थीं।
इसी प्रकार केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सबसे आगे संस्कृति विभाग की झांकी और उसके पीछे ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारतीय रेल, केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, जनजाति मामलों के मंत्रालय और अंत में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की झांकी चली। ये सभी झांकियां नई दिल्ली के राजपथ से लाल किला मैदान तक देश की रंगारंग विरासत का प्रदर्शन करते हुए चलीं।
राजस्थान की पर्यटन मंत्री बीना काक के मार्गदर्शन में तैयार की गई और गुलाबी रंग में सजी धजी इस आकर्षक जंतर-मंतर झांकी की परिकल्पना यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर में संरक्षित स्मारकों के लिए जयपुर के जंतर मंतर को सूचीबद्घ किए जाने के संदर्भ में की गई थी।
जयपुर नगर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा देश के विभिन्न भागों में निर्मित करवाई गई पांच वेधशालाओं में से जयपुर की जंतर मंतर वेधशाला ही वर्तमान में कार्यरत है। यहां मौसम संबंधी भविष्यवाणियों के साथ ही 'सोलर-सिस्टम' और ज्योतिष से संबंधित विभिन्न गणनाएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से की जाती हैं। ज्योतिष यहां प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन सम्राट यंत्र पर ध्वजा लगाकर हवा के रुख का अध्ययन करने के बाद मौसम संबंधी भविष्यवाणी करते हैं। जो प्राय: सटीक व सही साबित होती है।
राजस्थान की जंतर मंतर झांकी राजस्थान सरकार के कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा तैयार करवाई गई थी। इसके थ्री डी और टू डी मॉडल का संयोजन जयपुर के हरशिव शर्मा और पारस भंसाली द्वारा तैयार किया गया ।
झांकी के आगे मंगल कलश लिए राजस्थानी वेशभूषा में सजी धजी चार महिलाएं और मंत्रोच्चारण करते हुए पांच पंडित पैदल चले। इसकी कोरियोग्राफी जवाहर कला केन्द्र, जयपुर के हरिदत्त कल्ला ने की, जबकि मंत्रोच्चारणों को जयपुर के डा. विनोद बिहारी शर्मा एवं साथियों द्वारा स्वरबद्घ किया गया। झांकी के ऊपरी भाग में विभिन्न गणनाएं करते हुए ज्योतिष और देशी-विदेशी पर्यटक थ्री डी मॉडल्स विभिन्न मुद्राओं में दिखे।
दो भागों में विभक्त इस झांकी के अग्रभाग में गुलाबी नगर जयपुर की अनूठी और बेजोड़ स्थापत्य कला से संबंधित विभिन्न डिजाइन की जालियां, कंगूरे एवं झरोखों को दर्शाया गया। इसी प्रकार झांकी के पृष्ठभाग में सेना वाहन के ट्रेलर पर जंतर-मंतर के विभिन्न यंत्रों को दर्शाया गया और चारों ओर बारह राशियों के चिन्ह प्रदर्शित किए गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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