श्रीलंका में हिंसा के बावजूद भारी मतदान (लीड-1)
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में मतदान शुरू होने से पहले हुए कई सारे विस्फोटों के कारण क्षेत्र में 20 प्रतिशत से भी कम मतदान हुआ। लेकिन देश के बाकी हिस्सों में पिछले वर्ष मई महीने में तमिल विद्रोही, लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खात्मे के बाद देश में पहली बार हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में भारी मतदान की खबर है।
पर्यवेक्षकों ने कहा है कि देश में कुछ मतदाताओं को मतदान से रोका गया। इसके साथ ही प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक समर्थकों पर हमले किए गए और गोलियां दागी गईं। लेकिन इसके बावजूद इस दर्जे की कोई घटना नहीं घटी, जिससे मददान में बाधा आती।
जाफना के निवासियों ने कहा है कि मतदान शुरू होने से पहले जाफना प्रायद्वीप में पांच विस्फोट होने की सूचना है। यह इलाका पिछले 26 सालों से सरकार और लिट्टे के बीच जारी रही जंग का एक प्रमुख मैदान रहा है। लेकिन इन विस्फोटों में किसी के हताहत होने के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है।
पुलिस ने इस बात की पुष्टि तो की है कि उसने विस्फोट के धमाके सुने हैं, लेकिन उसने यह भी कहा है कि उसके पास किसी घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
मतदान समाप्त होने के बाद उपलब्ध तत्कालिक आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि देश में औसतन 70 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। अधिकारियों ने कहा है कि मतदान का अंतिम आकड़ा 80 प्रतिशत या उससे ऊपर तक जा सकता है।
मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ। करीब 11,000 मतदान केंद्रों पर 1.4 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। मतदान शाम चार बजे समाप्त हो गया।
वर्तमान राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे (64 वर्ष) सत्तारूढ़ यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम एलायंस (यूपीएफए) से फिर चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला पूर्व सेनाध्यक्ष सरथ फोंसेका (59 वर्ष) से है।
चुनाव मैदान में 20 अन्य उम्मीदवार भी हैं लेकिन मुख्य मुकाबला राजपक्षे और फोंसेका के बीच ही है।
राजपक्षे और फोंसेका दोनों लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ विजय का श्रेय लेना चाहते हैं। विपक्षी दल भ्रष्टाचार और राजपक्षे के कथित पारिवारिक शासन को मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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