लंदन सम्मेलन में चर्चा का विषय होगी अफगानिस्तान में भारत की भूमिका
लंदन, 26 जनवरी (आईएएनएस)। दुनिया भर के कई सारे मंत्री और सैन्य विशेषज्ञ गुरुवार को अफगानिस्तान पर आयोजित एक दिन की बैठक के लिए लंदन में जमा हो रहे हैं। इस बैठक में भारत को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश की जाएगी कि वह अफगानिस्तान में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत को मिला कर एक क्षेत्रीय परिषद बनाने के प्रस्ताव के कयासों के बीच कहा है, "मैं मानता हूं कि अफगानिस्तान के पड़ोसियों को वहां एक स्थिर लोकतंत्र की स्थापना में मदद के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। भारत को उसमें एक बड़ी भूमिका निभानी है।"
यद्यपि इस प्रस्ताव के विवरणों को गोपनीय रखा जा रहा है और इस्लामाबाद पहले ही अफगानिस्तान में भारत की भूमिका का विरोध कर चुका है, लेकिन टिप्पणीकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि नाटो में शामिल ताकतें अफगानिस्तान संकट के समाधान के लिए ताजा विचारों हेतु भारत से अधिक अपेक्षाएं लगा रखी हैं।
एक प्रतिष्ठित ब्रिटिश पत्रिका 'द स्पेक्टेटर' में कंजर्वेटिव पार्टी के समर्थक एक टिप्पणीकार ने लिखा है, "नाटो की रणनीति के लिए सफलता का रास्ता भारत से होकर गुजरता है।"
क्षेत्रीय परिषद के लिए लेबर पार्टी से जुड़े विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड के प्रस्ताव पर एक निष्पक्ष विचार व्यक्त करते हुए 'द स्पेक्टेटर' ने लिखा है कि अफगानी तालिबान समूहों को पाकिस्तानी मदद का मुकाबला करने के लिए भारत की मदद आवश्यक है।
पत्रिका में कहा गया है, "मिलिबैंड का विचार हर संभव मदद पाने का हकदार है।"
लेकिन यहीं पर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत को यह महसूस होता है कि यह प्रस्ताव कश्मीर पर चर्चा के लिए पिछले दरवाजे की कोशिशों का रास्ता खोल देगा तो वह इस प्रस्ताव को खारिज कर देगा।
पश्चिमी देशों को भारत की भूमिका में इसलिए रुचि बढ़ी है, क्योंकि नई दिल्ली अफगानिस्तान के विकास में, खासतौर से आधारभूत और मानवीय ढांचों के विकास में तेजी के साथ जुटा हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications