गणतंत्र दिवस परेड में सैनिक ताकत, संस्कृति की छंटा दिखी (लीड-1)
कोहरे के कारण परेड से पहले परंपरागत रूप से हेलीकॉप्टरों से राजपथ पर गुलाब की पंखुड़ियों को गिराना रद्द कर दिया गया बहरहाल 'फ्लाईपास्ट' तय कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुआ।
परेड में परंपरागत रूप से भारतीय सेना के नए आयातित हथियारों और स्वेदश में विकसित रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन किया गया। परेड 110 मिनट चली।
सशस्त्र सेनाओं, अर्धसैनिक बलों और राष्ट्रीय कैडेट कोर के साथ परेड में युद्धक टैंक अर्जुन, मध्यम दूरी की मिसाइल अग्नि-3, ध्वनि से तेज गति वाली मिसाइल सूर्य, एक हथियार बंद एंबुलेंस और अत्याधुनिक रडार आकर्षण का प्रमुख केंद्र था।
परेड की सलामी लेने वाली राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने शांति काल में देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार 'अशोक चक्र' से तीन व्यक्तियों को सम्मानित किया।
इनमें से दो लोगों-मेजर मोहित शर्मा और हवलदार राजेश कुमार को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया और उनकी विधवाओं मेजर रिशिमा शर्मा और मीता कुमार ने इसे ग्रहण किया।
तीसरा अशोक चक्र मेजर डी. श्रीराम कुमार को प्रदान किया गया।
गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली मयुंग-बक के साथ सलामी मंच के समक्ष पहुंचने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनकी अगवानी की।
इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इंडिया गेट युद्ध स्मारक पर अज्ञात जवान को श्रद्धांजलि दी।
दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.एस.ओबेरॉय ने परेड का नेतृत्व किया।
कोहरे के कम होने के बाद सबकी निगाहें आसमान की ओर थीं और उनको निराश नहीं होना पड़ा। सबसे पहले विशालकाय परिवहन विमान आईएल-76 राजपथ के ऊपर से गुजरा, उसके बाद छोटा परिवहन विमान एएन-32 और टोही विमान डोर्नियर गुजरा।
इसके बाद भारतीय वायुसेना में नया शामिल हुआ विमान अवाक्स (एयरबॉर्न वार्निग एंड कंट्रोल सिस्टम) और उसके पीछे दो सुखोई विमान लड़ाकू विमान गुजरे। जगुआर विमानों और तीन एसयु-30 विमानों ने आकाश में 'त्रिशूल' का आकार बनाते हुए उड़ान भरी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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