जल्द ही इतिहास बन जाएगी नौसेना की फॉक्सट्रोट पनडुब्बियां
नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। सोवियत निर्मित जिन फॉक्सट्रोट पनडुब्बियों के साथ नौसेना की पनडुब्बी इकाई अस्तित्व में आई थी, वे पनडुब्ब्यिां जल्द ही इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी। नौसेना की पनडुब्बी इकाई में बची इस श्रेणी की दो पनडुब्बियों को वर्ष 2011 तक सेवामुक्त कर दिया जाएगा। इन पनडुब्बियों ने 35 वर्षो से अधिक समय तक भारतीय नौसेना में अपनी कीमती सेवाएं दी हैं।
रूसी नौसेना ने फॉक्सट्रोट पनडुब्बियों को वर्ष 1995 और 2001 के बीच ही सेवामुक्त कर दिया था। लेकिन भारतीय नौसेना अभी तक उनमें से दो पनडुब्बियों की सेवाएं ले रही है। इन पनडुब्बियों में आईएनएस वेला को 1973 में बेड़े में शामिल किया गया था और आईएनएस वागली को वर्ष 1974 में।
नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "आईएनएस वेला को इसी वर्ष सेवामुक्त कर दिया जाएगा, जबकि अंतिम फॉक्सट्रोट आईएनएस वागली को 2011 में सेवामुक्त किया जाएगा।"
नाटो ने डीजल-विद्युत पनडुब्बियों की एक श्रेणी को फाक्सट्रोट श्रेणी का नाम दिया था। ये पनडुब्बियां सोवियत संघ द्वारा बनाई गई थीं। इस श्रेणी की पहली पनडुब्बी 1957 में तैयार हुई थी और उसे 1958 में सेवा में शामिल किया गया था। इस श्रेणी की अंतिम पनडुब्बी 1983 में तैयार हुई थी। उसके बाद फॉक्सट्रोट श्रेणी अप्रचलित हो गई।
अधिकारी ने कहा, "सोवियत संघ से फॉक्सट्रोट श्रेणी की चार पनडुब्बियों के अधिग्रहण के बाद भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा की शुरुआत हुई थी। उन प्रथम चार पनडुब्बियों को कैल्वरी श्रेणी की पनडुब्बियां कहा गया था। उन पनडुब्बियों के साथ जिन गड़बड़ियों का अनुभव किया गया था, उनसे रूस का डिजाइन ब्यूरो परेशान हो गया था।"
अधिकारी ने कहा, "धीरे-धीरे उनमें सुधार किया गया और हमने 1971 में चार और पनडुब्बियों के लिए अनुबंध किया। वेला श्रेणी की ये पनडुब्बियां 1973 और 1975 के बीच यहां पहुंचीं।"
नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इन आठ पनडुब्बियों में से फिलहाल दो सेवा में मौजूद हैं। छह वर्षीय मरम्मत कार्य में देरी के कारण प्रथम चार पनडुब्बियों की हालत तेजी के साथ बिगड़ती गई थी।
उन दिनों भारतीय नौसेना के पास पनडुब्बियों की मरम्मत करने का कौशल नहीं था। दूसरी ओर अपनी पनडुब्बियों की मरम्मत कार्यो के भारी बोझ के कारण रूसी विशेषज्ञ भारतीय पनडुब्बियों को अपनी गोदी में स्वीकार करने के प्रति उदासीन बने रहे।
लेकिन नौसेना के जिन अधिकारियों ने इन पनडुब्बियोंको इस्तेमाल किया है, उनके भीतर इनके सेवामुक्त होने पर एक अफसोस की भावना है।
आईएनएस वेला के कमान अधिकारी रह चुके एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "ये पनडुब्बियां द्वितीय विश्व युद्ध की जर्मन डिजाइन की है। लेकिन सच्चाई यह है कि वे 35 साल की सेवा के बाद भी काम करने की स्थिति में हैं। इसका अर्थ यह होता है कि पनडुब्बियां बहुत अच्छी हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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