लिट्टे के खात्मे के बाद पहली बार श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव

एम.आर.नारायण स्वामी

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खात्मे के बाद पहली बार श्रीलंका में मंगलवार को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान होगा।

तमिल चीतों को कुचलने में साथ रहे दो व्यक्तियों के बीच राष्ट्रपति पद पर कब्जा करने के लिए पूरे श्रीलंका में कड़ी लड़ाई देखी जा रही है।

यद्यपि चुनाव में 20 अन्य उम्मीदवार भी हैं लेकिन मुख्य मुकाबला राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और पूर्व सेना प्रमुख सरथ फोंसेका के बीच है। लिट्टे के दमन से पहले राजपक्षे और फोंसेका मित्र थे। दोनों ही सिंहली समुदाय से हैं।

बहुत अधिक समय नहीं गुजरा जब नवंबर 2005 में राष्ट्रपति बनने वाले राजपक्षे ने लिट्टे को समाप्त करने का संकल्प लिया था। लिट्टे के अप्रैल 2006 में किए गए हमले में बाल-बाल बचने वाले फोंसेका भी दुनिया में सबसे अधिक समय से जारी आतंकवाद को खत्म करने में उनके साथ खड़े थे।

पिछले वर्ष मई में लिट्टे को हराने और उसके नेतृत्व के खात्मे के बाद राजपक्षे और फोंसेका को श्रीलंका में भगवान जैसा माने जाने लगा। भले ही जीत की अत्यधिक मानवीय कीमत चुकानी पड़ी लेकिन बहुसंख्यक सिंहली समुदाय ने उनको नायकों का दर्जा दिया। इसके तुरंत बाद राजपक्षे और फोंसेका की मित्रता समाप्त हो गई।

राजपक्षे के खेमे का कहना है कि फोंसेका अपनी सीमा से बाहर जा रहे थे और लिट्टे के खिलाफ जीत का वास्तविक श्रेय राष्ट्रपति को जाना चाहिए जिन्होंने पश्चिमी दबाव के आगे घुटने नहीं टेके। फोंसेका पर एक सैन्य विद्रोह के प्रयास का भी आरोप लगाया गया।

जनरल ने पलटवार करते हुए कहा कि युद्ध के बाद राजपक्षे ने उनको अलग-थलग करने का प्रयास किया। उन्होंने नवंबर में सेना छोड़ी और विपक्षी पार्टियों के गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार बन गए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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