दुर्घटनाओं के बावजूद टक्कर-रोधी उपकरण पर रेलवे में फैसला नहीं
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। रेलगाड़ियों की एक और टक्कर में तीन लोगों की मौत के बावजूद रेल मंत्रालय ने देश में विकसित एक टक्कर-रोधी उपकरण (एसीडी) के उपयोग का फैसला टाल दिया है। इस उपकरण से कोहरे के समय दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है।
एसीडी का विकास कोंकण रेलवे के पूर्व प्रबंध निदेशक बी.राजाराम ने किया। कोंकण रेलवे और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में उपयोग किए जाने के बाद टक्कर टालने में इसकी सफलता का प्रतिशत 99.9 है।
राजाराम ने आईएएनएस से कहा, "रेलवे बोर्ड द्वारा नियमों में लगातार संशोधन करने से इस उपकरण का उपयोग वर्षो से लंबित है, यद्यपि प्रौद्योगिकी हर कदम पर सफल साबित हुई।"
उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय की सर्वोच्च शोध संस्था रिसर्च, डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स आर्गनाइजेशन और ब्रिटेन की सलाहकार लॉयड्स रजिस्टर रेल ने भी इस प्रौद्योगिकी को प्रमाणित किया हे। लॉयड्स रजिस्टर रेल में पूरी दुनिया के करीब 250 रेल सलाहकार सेवाएं देते हैं।
एडीसी उपकरण को नेशनल जियोग्राफिक चैनल पर भी दिखाया गया।
अपने कार्यकाल के दौरान रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के.सी.जेना ने आधिकारिक रूप से कहा था कि एडीसी को पहले दक्षिणी जोन में 2009 तक लगाया जाएगा और इसका उपयोग रेलवे में चरणबद्ध तरीके से होगा।
एडीसी का पायलट प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे को दिया गया जहां सिग्नल प्रणाली केवल आधे समय तक काम करती है और खराब विद्युत आपूर्ति से प्रभावित रहती है।
राजाराम ने आईएएनएस को बताया कि खराब मौसम में भी काम करने की प्रौद्योगिकी की क्षमता पर संदेह करने वाले विशेषज्ञों ने इसके परिणामों के सामने आने के बाद अपने शब्द वापस ले लिए। यह प्रौद्योगिकी दुनिया में हर कहीं सफल होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इन मीडिया आरोपों में कुछ सच्चाई हो सकती है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की एक ताकतवर लॉबी एसीडी के उपयोग में विलंब करना चाहती है, जिसे अपने प्रदर्शन के आधार पर आस्ट्रेलिया, इजरायल और मिस्र से आर्डर हासिल हुए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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