स्कूलों में बधिर बच्चों की उपेक्षा पर दिल्ली सरकार की निंदा

मयंक अग्रवाल

नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। पिछले 10 वर्षो में स्कूलों में बधिर बच्चों के लिए शिक्षक नियुक्त करने में असफल रही दिल्ली सरकार अब केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के निशाने पर है।

सीआईसी ने इस तरह के शिक्षकों की जानकारी नहीं दे सूचना के अधिकार (आरटीआई) के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दिल्ली के समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सूचना आयुक्त शैलेष गांधी ने अपने आदेश में कहा है, "ये स्पष्ट है कि विभाग ने साल 2000 से बधिर बच्चों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति न कर अपनी जिम्मेदारी की उपेक्षा की है।"

दक्षिण दिल्ली के निवासी अमरकेश महेंद्रू की याचिका पर यह फैसला आया है। महेंद्रू दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में बधिर बच्चों के शिक्षकों के खाली पदों को भरे जाने के संबंध में जानकारी चाहते थे।

महेंद्रू ने आईएएनएस को बताया, "इस समय बधिर बच्चों के लिए दिल्ली सरकार के चार स्कूल हैं, जहां 800 बच्चे पढ़ते हैं लेकिन इनमें शिक्षकों के 27 पद वर्षो से खाली पड़े हैं।"

उन्होंने बताया कि दिल्ली गेट इलाके के नजदीक शासकीय लेडी नॉयस सेकेंड्री स्कूल में 1996 से प्राचार्य की नियुक्ति नहीं हुई है। महेंद्रू बधिर बच्चों की पठन-पाठन प्रक्रिया पर तीन किताबें लिख चुके हैं।

महेंद्रू ने फरवरी 2009 में जनसंपर्क अधिकारी व संयुक्त निदेशक (प्रशासन) बी.आर. सिंह से इस संबंध में जानकारी लेनी चाही थी लेकिन उन्हें संतुष्टिदायक कोई जवाब नहीं मिला था। उन्हें अपीली प्राधिकरण के दखल पर पांच महीने बाद अक्टूबर में कुछ जानकारी मिली था।

सीआईसी का कहना है कि अधिकारी ने सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी का कोई उचित कारण नहीं बताया इसलिए उन पर जुर्माना लगाया जाना सही है।

गत 12 जनवरी को सुनवाई के दौरान बी.आर. सिंह ने सीआईसी को बताया कि दिसम्बर 2009 में साक्षात्कार के जरिए 24 पदों पर भर्ती की गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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