सूर्यग्रहण : प्रभावों के अध्ययन के लिए रॉकेटों का प्रक्षेपण (लीड-1)

बेंगलुरू/भुवनेश्वर, 15 जनवरी (आईएएनएस)। एक वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने कहा है कि सदी के सबसे लंबे सूर्यग्रहण के कारण ऊपरी वातावरण पर तथा पृथ्वी के वातावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के अध्ययन के लिए शुक्रवार को छह रॉकेटों का प्रक्षेपण किया गया। इन रॉकेटों में प्रभावों को मापने वाले उपकरण लगे हुए हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के परियोजना निदेशक पी.रत्नाकर राव ने आईएएनएस को तिरुवनंतपुरम से फोन पर बताया, "रॉकेटों के साथ लगे विभिन्न उपकरणों ने सूर्य ग्रहण का अवलोकन किया है और पृथ्वी के वातावरण, हवा, विद्युत व चुंबकीय क्षेत्रों तथा प्लाज्मा पर पड़ने वाले उसके प्रभाव से संबंधित ढेर सारे आंकड़े जुटाए हैं।"

इसरो ने केरल में स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के थुंबा इक्वाटोरियल रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र (टीईआरएलएस) से रोहिणी 300 श्रृंखला के तीन और रोहिणी 200 श्रृंखला के दो रॉकेटों सहित पांच रॉकेटों का अपराह्न् 12.20 से 4 बजे के बीच प्रक्षेपण किया।

इसके अलावा इसरो ने छठे रोहिणी रॉकेट (रोहिणी 560) को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से अपराह्न् लगभग 4.30 बजे प्रक्षेपित किया।

राव ने कहा, "जब सूर्य ग्रहण लगा तो उस समय सौर विकिरण अचानक रुक गया। सौर विकिरण का यह रुकना वातावरण की संरचना और उसकी गतिकी को प्रभावित करेगा।"

राव ने कहा, "रॉकेटों ने उपकरणों सहित समुद्र में गिरने के पूर्व संबंधित अंतरिक्ष केंद्रों में स्थित हमारे केंद्रों को आंकड़े भेजे हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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