हैती में मलबे से 40 घंटे बाद सुरक्षित निकला संयुक्त राष्ट्रकर्मी
यह शख्स हैं टर्मो जोएवीर जो अमेरिकी शहर मियामी के निवासी हैं। वह हैती की राजधानी पोर्ट-ओ-पिं्रस स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन में बतौर सुरक्षा अधिकारी तैनात थे। मंगलवार के शक्तिशाली भूकंप में मिशन की छह मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढेर हो गई। इस इमारत में कार्यरत संयुक्त राष्ट्र के 14 कर्मचारियों के मारे जाने की अब तक पुष्टि हुई है और कई लापता हैं।
संयुक्त राष्ट्र मिशन की इमारत ढहने से भले ही जोएवीर के कई सहकर्मी मारे गए लेकिन वह किस्मत के धनी थे जो मलबे में दबे रहने के बावजूद लगभग 40 घंटों तक जीवित रहे और गुरुवार को मलबे से सुरक्षित बाहर भी आ गए। स्थानीय समाचार पत्र 'मियामी हेराल्ड' के अनुसार अमेरिकी राहत दल ने छह घंटों की मशक्कत के बाद जोएवीर को बाहर निकाला।
भूकंप आने से आधे घंटे पहले ही जोएवीर ने मियामी फोन कर अपनी पत्नी मैमी से बात की थी। इस भूकंप की खबर सुनने के बाद मैमी परेशान होकर लगातार जोएवीर से संपर्क करने का प्रयास करती रहीं लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। मैमी ने कहा, "लगतार कोशिश करने के बावजूद मैं संपर्क नहीं कर पा रही थी और इस वजह से मेरी घबराहट बढ़ने लगी थी।"
बुधवार को दिन में स्थानीय समयानुसार लगभग एक बजे मैमी के पास संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों की ओर से फोन आया कि उनके पति मलबे में दबे हुए हैं। इसके बाद गुरुवार सुबह 7.30 बजे दोबारा फोन आया कि जोएवीर को बचा लिया गया है। मैमी कहती हैं, "ये मेरी जिंदगी का सबसे कठिन समय था। परंतु मैं अपने दोनों छोटे बच्चों को देखकर शांत रही।"
उल्लेखनीय है कि भूकंप मंगलवार को हैती के समयानुसार शाम में 4.53 बजे आया था। इसका केंद्र राजधानी से 15 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में था। अधिकारियों का कहना है कि 100,000 से अधिक लोग मारे गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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