मछलियों की याददाश्त क्षणिक होने की थ्योरी गलत : शोध

चार्ल्स स्टेर्ट यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ लैंड, वाटर एंड सोसायटी के शोधकर्ता केविन वारबर्टन ने अपने शोध निष्कर्ष में कहा है कि यह थ्योरी पूरी तरह गलत है कि मछलियों की याददाश्त महज तीन सेकंड की होती है। वह लंबे समय से मछलियों के व्यवहार का अध्ययन करते रहे हैं।

वारबर्टन ने कहा, "मछलियों की स्मरण-अवधि लंबी होती है और एक बार हमले से बचने के बाद वह इस अनुभव का इस्तेमाल कई महीनों तक परभक्षियों से बचने में करती हैं। एक बार शिकारी के कांटे में फंसकर निकलने के बाद कम से कम एक साल तक वह कांटे के पास नहीं फटकती है।"

उन्होंने सिल्वर पर्च नामक मछली को अपने शोध का विषय बनाया। उन्होंने विभिन्न तरह के प्रलोभनों एवं शिकार के तरीकों को इन मछलियों पर आजमाया। वह कहते हैं, "जब उसके सामने एक आहार पेश किया गया तो उसमें ज्यादा आक्रामकता देखी गई, पर जब दो आहार पेश किए गए तो आक्रामकता काफी कम देखी गई और वह भ्रमित नजर आई। जाहिर है उसका ध्यान बंट गया। यह मछली के सीखने का तरीका है। ऐसी प्रवृति मछली बार-बार दोहराती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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