सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द (लीड-2)
न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी और न्यायमूर्ति आफताब आलम की खंडपीठ ने सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन शेख की ओर से इस संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह फैसला सुनाया।
अदालत ने गुजरात पुलिस से इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों को सीबीआई के सुपुर्द करने को कहा और सीबीआई से इसकी जांच छह महीने के भीतर पूरी करने को कहा।
अदालत ने कहा, "सीबीआई के अधिकारी इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेंगे, सोहराबुद्दीन और कौसर बी की हत्या और कथित षडयंत्र की भी। अदालत यह भी अपेक्षा करती है कि गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान की पुलिस इस जांच में सीबीआई की मदद करेगी।"
इस बीच, इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने पर सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन शेख ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को जांच सौंपे जाने से उन्हें इस मामले में न्याय की उम्मीद जगी है।
रूबाबुद्दीन ने मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से फोन पर आईएएनएस से बातचीत में कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से मैं बहुत खुश हूं। गुजरात पुलिस इस मामले की जिस तरह से जांच कर रही थी उससे मैं संतुष्ट नहीं था।"
उन्होंने कहा, "सीबीआई इस मामले की गहराई से जांच करेगी और मुझे उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा। मेरे भाई और भाभी के हत्यारों का पता चल सकेगा। "
ज्ञात हो कि गुजरात पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी। जांच से नाखुश होकर रूबाबुद्दीन ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। गुजरात सरकार अब तक दावा करती रही है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच करवा रही है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 के नवम्बर महीने में सोहराबुद्दीन को गुजरात पुलिस ने एक कथित मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इसके बाद उसकी पत्नी कौसर बी गायब हो गई थी। बाद में सबूतों को मिटाने के लिए कौसर बी और उसके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी कथित तौर पर पुलिस ने हत्या कर दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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