'मुजीब के हत्यारे दया के हकदार नहीं'

समाचार पत्र 'द डेली स्टार' के मुताबिक बांग्लादेश के कानून मंत्री शफीक अहमद ने कहा कि राष्ट्रपति से क्षमादान चाहने वाले बांग्लादेश सेना के दोषी तीनों अधिकारियों की सजा में किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन राष्ट्रपति चाहे तो उन्हें क्षमादान दे सकते हैं। तीनों अधिकारियों को मौत की सजा दी गई है।

उन्होंने कहा कि दोषियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति के साथ उनके परिवार के ज्यादातर सदस्यों की भी हत्या कर दी थी। यह इतिहास की सबसे जघन्य घटना थी, ऐसे में हत्यारों को कैसे माफ किया जा सकता है।

ए.के.एम.मोहिउद्दीन, बजलुल हुडा और मोहिउद्दीन अहमद ने शनिवार को गृह मंत्रालय के पास दया याचिका भेजी थी जबकि कानून मंत्रालय इस मसले पर पहले ही अपनी कानूनी राय दे चुका है।

उन्होंने कहा कि दोषी जब सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर लेंगे, सरकार तभी मौत की सजा तामील करेगी।

शेख मुजिबुर्रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की 15 अगस्त 1975 को बांग्लादेशी सेना के अधिकारियों के एक समूह ने हत्या कर दी थी।

इस मामले में पांच दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी। दो अन्य दोषियों सैयद फारुक रहमान और सुल्तान शहरयार राशिद खान ने राष्ट्रपति के समक्ष अभी तक क्षमा याचिका दाखिल नहीं की है। राष्ट्रपति के समक्ष याचिका दाखिल करने की समय सीमा 9 जनवरी को समाप्त हो चुकी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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