साजिश का पता लगाने के लिए कनाडा ने खर्च किए लाखों डॉलर

टोरंटो, 12 जनवरी (आईएएनएस)। कनाडा में चार वर्ष पहले अलकायदा के आतंकी हमले की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए खुफिया एजेंसी ने लाखों डॉलर खर्च किए। हमले की साजिश रचने वालों में अधिकांश पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी थे।

कनाडा की खुफिया एजेंसियों ने साजिश के बारे में जनाकारी हासिल करने के लिए एक मुस्लिम एजेंट को पैसे दिए थे। जून 2006 में अल कायदा कनाडा की संसद पर हमला करना चाहता था। इस आतंकी साजिश को 'टोरंटो -18' के नाम से जाना जाता है।

हमले की साजिश में शामिल अधिकतर आतंकवादी टोरंटो के उपनगरीय इलाके मिसीसाउगा के रहने वाले थे। कनाडा में इसे मुस्लिम बहुसंख्यक इलाके के रूप में जाना जाता है।

आतंकवादी संसद पर हमला कर प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर और अन्य लोगों को बंधक बनाकर उनकी हत्या करना चाहते थूे। इसके अलावा वे टोरंटो स्टॉक एक्सचेंज और खुफिया एजेंसी की इमारतों को भी निशाना बनाना चाहते थे।

आतंकी हमले की साजिश के लिए आंतकवादियों को दिसंबर 2005 में प्रशिक्षण भी दिया गया था। आतंकी हमले की साजिश रचने वाली टीम का मुखिया जकारिया अमारा था। उसे पिछले साल अक्टूबर में हमले की साजिश रचने के मामले में दोषी करार दिया गया था।

हमले की साजिश का पर्दाफाश एक मुस्लिम युवक शहर इलशोमे ने किया था। उसे रॉयल कनाडियन माउटेंड पुलिस (आरसीएमपी) ने अपना मुखबिर बनाया था और उसे 41 लाख डॉलर भी दिया था।

अभी तक इस मामले में चार आतंकवादियों को दोषी करार दिया जा चुका है। सोमवार को अदालत में गवाही के दौरान शरीफ अबदेलहलीम ने कहा कि आठ अक्टूबर 2006 को हुई बैठक में उसे रासायनिक पदार्थ लाने के लिए कहा गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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