शीशे की थोड़ी मात्रा भी क्षतिग्रस्त कर सकता है बच्चों का गुर्दा
वर्तमान समय में जिन स्रोतों से बच्चों के शरीर में शीशे की मात्रा जा सकती है, उनमें दीवारों या खिलौनों पर लगा शीशा युक्त रंग, घरेलू उपचार, चमकीले मिट्टी के बरतन, मिट्टी और कुछ शहरी इलाकों के पुराने घरों में पीने का पानी शामिल हैं।
वर्ष 1991 में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) ने बच्चों के लिए शीशे की सुरक्षित मात्रा को एक लीटर रक्त के प्रति दसवें हिस्से पर 30 माइक्रोग्राम से घटाकर 10 माइक्रोग्राम कर दिया था।
लेकिन जॉन हाफकिन्स चिल्ड्रेन्स सेंटर ने सबूत के साथ दावा किया है कि 10 माइक्रोग्राम के नीचे की मात्रा भी गुर्दे की कार्यप्रणाली पर बुरा असर डाल सकता है।
हॉफकिन्स चिल्ड्रेन्स सेंटर में बाल रोग विशेषज्ञ और इस अध्ययन के प्रमुख जेफरी फैद्रोवस्की ने कहा है, "हमारी जानकारी में यह पहला ऐसा अध्ययन है, जो यह बताता है कि बच्चे के शरीर में शीशे की बहुत थोड़ी मात्रा भी उसके गुर्दे की कार्यपद्धति पर बुरा असर डाल सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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