मलेशिया में 'अल्लाह' को लेकर रस्साकशी

मलेशिया में 'अल्लाह' को लेकर रस्साकशी

मलेशिया में ग़ैर मुसलमानों के अल्लाह शब्द के प्रयोग को लेकर रविवार को भी ईसाइयों के धार्मिक संस्थानों पर हमले हुए हैं.

मलेशिया पुलिस का कहना है कि रविवार की सुबह उत्तरी प्रांत पेराक में ऑल सेंट चर्च और एक कैथलिक कॉंन्वेंट स्कूल में हमलावरों ने पेट्रोल बम फेंक कर आग लगाने की कोशिश की.

इनके अलावा सरवाक द्वीप के एक चर्च पर भी इसी तरह का हमला हुआ है.

मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रज़ाक और अन्य नेता इन हमलों की निंदा कर चुके हैं, उसके बावजूद हमलों का सिलसिला थमा नहीं है.

इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी राजधानी कुआलालंपुर के सीमावर्ती इलाके में चार चर्चों पर पेट्रोल बम फेके गए थे.

ये धार्मिक हिंसा पिछले महीने तब से बढ़ गई थी जब मलेशिया की एक अदालत ने सरकार के आदेश को उलटते हुए ये फ़ैसला सुनाया था कि ईसाई प्रकाशनों में ईश्वर के लिए अल्लाह शब्द का प्रयोग किया जा सकता है.

सरकार की दलील थी कि ग़ैर मुसलमान अगर अल्लाह शब्द का प्रयोग करेंगे तो देश में अशांति फैल सकती है.

लेकिन उच्च न्यायालय ने सरकार के आदेश को असंवैधानिक क़रार देते हुए कहा था कि अल्लाह शब्द सिर्फ़ इस्लाम से ही संबद्ध नहीं है.

संदेह

मामले की सुनवाई के दौरान कैथोलिक ईसाइयों के अख़बार हेराल्ड ने दलील दी थी कि चर्च में अल्लाह शब्द का प्रयोग दशकों से हो रहा है. हेराल्ड ने सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ 2007 में अदालत में अपील दायर की थी.

कई मुस्लिम संगठनों ने अल्लाह शब्द के प्रयोग के बारे में कैथोलिक चर्च के आग्रह पर संदेह व्यक्त किया था.

इनका ये मानना था कि अल्लाह शब्द के प्रयोग के आग्रह से चर्च की मुसलमानों को धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनाने की मंशा ज़ाहिर होती है.

मलेशिया की आधी से ज़्यादा आबादी मलय मुसलमानों की है. बाक़ी आबादी में चीनी और भारतीय मूल के लोगों की बहुलता है जो कि मुख्यत: ईसाई, बौद्ध और हिंदू धर्मों को मानने वाले हैं.

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