15 जनवरी को आसमान में दिखेगा आग का छल्ला
दिल्ली में भी लोग कुछ हद तक इसका आनंद उठा सकेंगे, क्योंकि यहां सूर्य का आधे से अधिक हिस्सा ग्रहण की अवस्था में दिखाई देगा।
कुंडलाकार सूर्य ग्रहण की घटना तब घटती है, जब सूर्य और चंद्रमा एक रेखा में आ जाते हैं। लेकिन चंद्रमा की छाया सूर्य की आकृति से छोटी होती है। इस कारण ग्रहण की अवस्था में सूर्य आग के छल्ले जैसा दिखाई देता है और उसकी किरणें चंद्रमा की परिधि से बाहर बिखरती हुई दिखाई देती हैं।
इसके पहले 22 नवंबर 1965 को आसमान में आग का छल्ला दिखाई दिया दिया था और 15 जनवरी के बाद 21 जून 2020 के पहले यह दृश्य आसमान में नहीं दिखाई देगा।
हिंद महासागर के ऊपर यह सूर्य ग्रहण अधिकतम 11 मिनट आठ सेकण्ड तक रहेगा। इस कारण यह सहस्त्राब्दी का सबसे लंबा कुंडलाकार सूर्य ग्रहण होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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