फ्रांस में पगड़ी पर रोक से आहत हैं प्रवासी सिख
क्रिस्टीन नयागम
पेरिस, 6 जनवरी (आईएएनएस)। फ्रांस में सभी सार्वजनिक स्थलों पर सिखों के पगड़ी पहनने पर लगी रोक से फ्रांस का सिख समुदाय आहत है। भारत में प्रवासियों के सालाना सम्मेलन प्रवासी भारतीय दिवस(पीबीडी) में भाग लेने वाला सिख प्रतिनिधिमंडल यह मसला भारत सरकार के समक्ष रखेगा।
ऐसे में जब इस विवाद को सुलझाने के सभी प्रयास विफल हो गए हैं, सिखों ने अब भारत सरकार और दुनिभा भर के प्रवासी भारतीयों के समक्ष यह मसला उठाने का फैसला किया है।
उल्लेखनीय है कि मार्च 2004 में फ्रांसीसी संसद ने एक कानून पारित कर स्कूल, अस्पताल, टाउन हॉल जैसे सभी सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कानून के खिलाफ सिखों के विरोध प्रदर्शनों के बावजूद सरकार झुकने को तैयार नहीं हुई।
पेरिस के बोबिग्नी गुरुद्वारे के अध्यक्ष चैन सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हम चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय कार्य मंत्री वायलार रवि हमारा हाथ मजबूत करें और इस मसले पर फ्रांसीसी सरकार को सिखों की भावना से अवगत कराएं। यह हमारी धार्मिक पहचान का मामला है। अगर भारत सरकार इस स्तर पर सक्रियता दिखाती है तो निश्चित तौर पर इस पर सकारात्मक प्रगति होगी। पगड़ी सिखों की सबसे बड़ी पहचान है।"
पीबीडी में भाग लेने वाला सिख प्रतिनिधिमंडल व्यालार रवि को एक ज्ञापन भी सौंपेगा। पीबीडी सात से नौ जनवरी तक आयोजित होगा।
इस ज्ञापन पर पेरिस के चार गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों के अलावा फं्रास में रहने वाले करीब 4,000 सिखों के हस्ताक्षर हैं। सिखों का कहना है कि पूरी दुनिया में फ्रांस ही एकमात्र ऐसा देश है जहां सिखों को ऐसी बंदिशों का सामना करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि सिखों की धार्मिक पहचान के बारे में फ्रांस की सरकार ज्यादा वाकिफ नहीं है, इसलिए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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