रुचिका मामले में अब हमें न्याय मिलने का यकीन: आराधना
पंचकुला पुलिस ने मंगलवार को राठौड़ के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है। उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत रुचिका गिरहोत्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। राठौड़ द्वारा दुर्व्यवहार करने के तीन साल बाद 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।
पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राठौड़ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पंचकुला पुलिस प्रमुख मनीष चौधरी ने इसकी पुष्टि की है।
मामले की अकेली प्रत्यक्षदर्शी आराधना ने आईएएनएस से कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने अपना वादा पूरा किया और राठौड़ के खिलाफ धारा 306 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई। अब राठौड़ का प्रभाव तेजी से खत्म होगा और हमें यकीन है कि आगे हमें उचित न्याय मिलेगा।"
उन्होंने कहा, "हम पिछले 16 वर्षो से राठौड़ के खिलाफ यह प्राथमिकी दर्ज कराना चाहते थे। अब हम चाहते हैं कि जांच एजेंसियां एक निर्धारित समय सीमा में अपनी जांच पूरी करें ताकि मामले में और देरी न हो।"
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने चण्डीगढ़ में 21 दिसम्बर को पंचकुला के 12 अगस्त 1990 के रुचिका दुर्व्यवहार मामले में राठौड़ को दोषी पाया था। उसे छह महीने की कैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा मिली थी। पर उसे जमानत पर तुरंत रिहा कर दिया गया था।
रुचिका और उसके परिवार की ओर से लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे आराधना के पिता आनंद प्रकाश ने कहा, "अब राठौर को कठोर दंड से कोई नहीं बचा सकता। हम उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं। उसने और उसकी पत्नी ने झूठे दस्तावेज तैयार किए हैं और हम अदालत में उन सभी का सामना करने के लिए तैयार हैं।"
उन्होंने कहा कि अब मामले में नई प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन्हें यह कानूनी लड़ाई जीतने का विश्वास है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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