महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएं : प्रधानमंत्री (लीड-1)
राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (सीएसपीओसी) में सिंह ने कहा, "लोकतंत्र के प्रति भारत का भरोसा हमारे स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान पनपा। तब से जहां अधिकांश विकासशील देशों ने शासन का अधिनायकवादी रास्ता चुना, भारत बहुदलीय लोकतंत्र पर कायम रहा।"
उन्होंने कहा, "यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा। इसमें दबाव और तनाव आए। अक्सर कड़े राजनीतिक मुकाबले के बावजूद भारत बहुदलीय लोकतंत्र बना रहा। लोकतंत्र ने हमारी राजनीति और संस्थाओं को मजबूती दी है।"
लोकतंत्र के लिए महिलाओं की व्यापक प्रतिभा क्षमता के उपयोग को अपरिहार्य बताते हुए प्रधानमंत्री ने राजनीति और विकास प्रक्रिया में महिलाओं की अधिक सार्थक भूमिका की वकालत की।
सिंह ने कहा, "प्रतिनिधि संस्थाओं को युवाओं की ऊर्जा और उत्सुकता तथा हमारी महिलाओं की व्यापक प्रतिभा क्षमता का उपयोग करने के उपायों पर सोचना चाहिए।"
लोकसभा अध्यक्ष मीराकुमार की अध्यक्षता में सोमवार को शुरू हुए इस सम्मेलन में 42 देशों की संसदों के 50 अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
मृदुभाषी के साथ-साथ अनुशासनप्रिय होने के लिए मीराकुमार की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद को सुचारू तरीके से चलाना, सभी हिस्सों को प्रतिनिधित्व और बोलने का मौका देना जटिल और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि संसद में अध्यक्ष पद की इन चुनौतियों का सामना बहुत सम्मानित महिला मीराकुमार कर रही हैं, जो मृदुभाषी लेकिन अनुशासनप्रिय है।
उन्होंने कहा, "महिलाओं को राजनीति और विकास प्रक्रिया में अधिक सार्थक भूमिका देना अपरिहार्य है। मुझे कहते हुए गर्व है कि भारत में स्थानीय निकायों में 10 लाख से अधिक निर्वाचित महिलाओं का प्रतिनिधित्व है। वे हमारे लोकतंत्र को मजबूत और विकास प्रक्रिया को समृद्ध कर रही हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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