'भूख के कारण आतंकवाद का रास्ता चुना'
जम्मू। भूख इंसान से क्या नहीं करा सकती, कुछ ऐसी ही बात चरितार्थ होती है पाकिस्तान के 22 वर्षीय आतंकवादी तनवीर अहमद पर। तनवीर हाथों में हथियार लिए कोहराम मचाने के मंसूबे साथ भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था लेकिन अब वह जेल में हैं। तनवीर का कहना है कि उसके बदहाल आर्थिक हालात ने उसे आतंकवादी बना दिया।
तनवीर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद में मनशेरा इलाके का बाशिंदा है। उसका ताल्लुक एक गरीब परिवार से है। वह विगत 15 नवंबर को पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा पार कर भारत में दाखिल होने की कोशिश में था और उसी समय भारतीय सेना की गिरफ्त में आ गया।
शिविरों मे प्रशिक्षण
पूछताछ के दौरान तनवीर ने बताया कि मां-बाप के कहने पर वह अपने गांव में सड़क के किनारे बने रेस्तरां में रसोइए की नौकरी कर रहा था। उसने कहा, "पाकिस्तान में मुझे इस नौकरी से जितने पैसे मिल रहे थे उससे गुजारा कर पाना नामुमकिन था। मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न की वजह से मैंने आतंकवाद की ओर रुख कर लिया ताकि आसानी से पैसा बना सकूं।"
उसका कहना है कि आतंकवादी संगठन 'अल-बद्र' का एक स्थानीय आतंकवादी उसके इलाके में युवकों को आतंकवाद में शामिल होने के लिए गुमराह करता था और उसने ही उसे भी आतंकवाद की ओर रुख कराया। तनवीर ने अधिकारियों को बताया, "युवकों की भर्ती करने के बाद उन्हें निकट के जंगलों में एक अज्ञात स्थान पर ले जाया जाता है। वहां आतंकवादी शिविरों के लिए न्यूनतम ढांचा मौजूद है।"
घुसपैठ के लिए भेजा
उसने कहा, "वहां प्रशिक्षण बहुत कठिन था। प्रशिक्षण तड़के 2.30 बजे आरंभ होता था और शाम छह बजे तक चलता था। इस दौरान कुछ भी खाने और आराम करने की इजाजत नहीं थी।" तनवीर ने कहा कि तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद उसे तथा एक अन्य युवक को भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए भेजा गया।
सेना के सूत्रों ने बताया कि पहली बार दोनों की घुसपैठ की कोशिश की भनक लग गई थी लेकिन वे खराब दृश्यता की वजह से बच निकले। तीन दिनों के बाद एक युवक निकट के गांव में खाने की तलाश में पहुंचा। एक अधिकारी ने बताया कि तनवीर पत्तियों और पानी के सहारे 15 दिनों तक जंगलों में छिपा रहा। गश्त लगा रहे जवानों ने उसे अचेत पाया जबकि उसका साथी मारा गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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