ेसरहद पार से आया 'ट्रक आर्ट'
पाकिस्तान का स्वयं सेवी संगठन 'इदारा-ए-तालीम-ओ-अगाही' बच्चों में शिक्षा को बढ़ावा देने का काम करता है। इस संगठन के प्रयासों से पारंपरिक ट्रक आर्ट को अब रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं में उकेरा जा रहा है।
एनजीओ की संयोजक किरण खान ने आईएएनएस से कहा, "हम जिन वस्तुओं को यहां लाए हैं उन पर उन्हीं बच्चों ने चित्रकारी की है जिन्हें हम शिक्षित करते हैं। इन वस्तुओं को यहां बहुत पसंद किया जा रहा है और हमारी ज्यादातर कलाकृतियां बिक गई हैं। हमें लोगों की ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। इन वस्तुओं को हमारी अपेक्षाओं से अधिक पसंद किया गया।"
ट्रक आर्ट एक पाकिस्तानी परंपरा है, जो 1920 के दशक से शुरू हुई थी। तब परिवहन कंपनियों ने प्रतियोगिता के चलते कलाकारों से अपने ट्रकों पर इस उम्मीद में कलाकृतियां बनवाना शुरू किया था कि चलती-फिरती कलाकृतियां लोगों को अधिक आकर्षित करेंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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