देश में 35 हजार अतिरिक्त आंगनवाड़ियां खुलीं
इस वर्ष 30 सितम्बर, 2009 तक 35,614 आंगनवाड़ियां चालू हो चुकी हैं। देशभर में आंगनवाड़ियों की संख्या अब 10,79,883 हो गई है जो 6़88 करोड़ बच्चों को पोषाहार प्रदान कर रही हैं और 3़32 करोड़ बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा एकीकृत बाल विकास योजना के तहत 3 दिसम्बर 2009 तक राज्यों को 49 अरब 73 करोड़ 10 लाख रुपये जारी किये जा चुके हैं।
महिलाओं का समग्र सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण मिशन के गठन के लिये एक प्रस्ताव तैयार किया है। मिशन के तहत महिलाओं के कल्याण और विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को एक साथ लाना सुनिश्चित किया जाएगा।
इसी के साथ 13-18 आयु समूह की किशोरियों के लिये सबला नाम की एक नई योजना तैयार की गई है जिसके तहत उनको समर्थ और सशक्त बनाने के लिये उनके स्वास्थ्य को सुधारने हेतु पौष्टिक आहार प्रदान किया जाएगा। यह योजना शीघ्र ही शुरू की जाएगी।
योजना आयोग ने ग्यारहवीं योजना में इस कार्यक्रम के लिये 45 अरब रूपये निर्धारित किये हैं। इसके अलावा, सरकार ने 2009-10 में 51 चुने हुए जिलों में निर्बल (कम वजन वाली) किशोरियों की पोषाहार की स्थिति में सुधार लाने के लिये राष्ट्रीय किशोरी कन्या कार्यक्रम को जारी रखने का निर्णय लिया है ।
गर्भवती और शिशुवती महिलाओं के पोषाहार और स्वास्थ्य की स्थिति को बढा़वा देने हेतु उन्हें नवाद सहायता प्रदान करने के उद्देय से सशर्त मातृत्व लाभ एक नई योजना तैयार की जा रही है। इसके बारे में योजना आयोग और कोर कमेटी के बीच सलाह माविरा जारी है। ग्यारहवीं योजना में इसके लिये 45 अरब रूपये का आवंटन किया गया है।
एकीकृत बाल संरक्षण योजना को इस वर्ष औपचारिक रूप से शुरू किया जा चुका है। वर्तमान में योजना के लिये 60 करोड़ रूपये की राशि आवंटित की गई है। इस योजना पर मुख्यत: राज्य सरकारों के जरिये काम किया जाएगा। सरकार ने आईसीपीएस पर अमल करने के लिये आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर की राज्य सरकारों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। इनके अलावा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, असम और गोवा ने भी अपने-अपने राज्यों में इस योजना को तेजी से लागू करने के लिये समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की इच्छा जताई है।
महिलाओं के स्वसहायता समूहों और अन्य महिला उद्यमियों को ऋण प्रदान करने के लिये सरकार ने राष्ट्रीय महिला कोष (आरएमके) के पुनर्गठन की पहल की है। मंत्रालय ने आरबीआई, सिडबी, नाबार्ड, कपार्ट और वित्त मंत्रालय के बैंकिंग विभाग के प्रतिनिधियों को लेकर एक उपसमूह का गठन किया है जो आरएमके के पुनर्गठन की धारणा और ढांचे के विकास पर विचार करेगा।
महिला और बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष में प्रियदर्शिनी के तहत केन्द्रीय क्षेत्र के महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका कार्यक्रम को लागू करने का प्रस्ताव किया है। इस परियोजना का उद्देय असुरक्षित और वंचित वर्ग की महिलाओं को समग्र और स्थायी रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे स्वयं अपनी सामाजिक, राजनीतिक, वैधानिक, स्वास्थ्य संबंधी और आर्थिक समस्याओं का हल ढूंढ सकें। इस कार्य को अमल में लाने वाली प्रमुख एजेंसी राष्ट्रीय षि एवं ग्रामीण विकास बैंक है। परियोजना की अवधि 8 वर्ष की होगी।
उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ चुने हुए जिलों में इस पर काम शुरू हो चुका है। वर्ष के अंतर्गत, मंत्रालय ने 2 अक्तू बर 2009 को देशभर में कार्यरत 10 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों में काम कर रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को शामिल करते हुए घरेलू हिंसा के विरुद्घ जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। इसी प्रकार दहेज की बुराई के खिलाफ चेतना जगाने के लिये दहेज के विरुद्घ बेटियां अभियान भी चलाया जा रहा है। बालिकाओं के साक्तीकरण से जुड़े मुद्दों के बारे में जागृति लाने वाला यह कार्यक्रम नवम्बर 2009 में शुरू किया जा चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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