अब रुचिका के स्कूल की प्रधानाचार्या जांच के घेरे में
शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरे मामले में सिस्टर की भूमिका की जांच करने के लिए यहां आए हैं। चण्डीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2005 में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए सिस्टर को सम्मानित किया था।
सितंबर 1990 में जब स्कूल ने रुचिका को निकाला था उस वक्त सिस्टर ही प्रधानाचार्या थीं। चण्डीगढ़ प्रशासन ने इस मामले की जांच मजिस्ट्रेट से कराने का आदेश दिया था।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को स्कूल परिसर के बाहर प्रदर्शन किया और प्रशासन से स्कूल की संबद्धता खत्म करने और सिस्टर से सम्मान वापस लेने की मांग की।
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस.राठौर ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने पिछले दिनों रुचिका मामले में राठौर को छह महीने की सजा सुनाई थी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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