गंभीर सुरक्षा चूक का नतीजा है विमान को उड़ाने षडयंत्र : ओबामा (राउंडअप)

ओबामा ने कहा कि खुफिया विभागों को सुरक्षा कमियों को दूर करने में सक्षम होना चाहिए और स्वीकार किया कि अब्दुल मुतल्लिब को कभी भी अमेरिकी विमान में सवार होने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वह जांच के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने हर स्तर पर जवाबदेही पर जोर दिया।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार हवाई में छुट्टियां मना रहे ओबामा ने एक रेडियो संदेश में कहा कि तंत्र और इंसानों की सामूहिक विफलता के कारण विनाशकारी साबित हो सकने वाली सुरक्षा चूक हुई।

उन्होंने कहा, "हमें इस घटना से सबक सीखने और व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है क्योंकि हमारी सुरक्षा और हमारे लोगों के जीवन दांव पर लगे हैं।"

ओबामा ने उड़ानों में सवार होने वालों की सुरक्षा जांच प्रक्रिया की समीक्षा और संदिग्ध लोगों से निपटने के सरकारी तरीके की जांच करने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि जांच के आरंभिक नतीजे गुरुवार तक और पूरी समीक्षा अगले सप्ताह आने की उम्मीद है।

ओबामा ने कहा, "हमारी सरकार के पास एक आतंकवादी के बारे में सूचना थी लेकिन उस सूचना को साझा नहीं किया गया और उस पर वैसी कार्रवाई नहीं हुई जैसी होनी चाहिए थी। यह व्यवस्था की विफलता है और मैं मानता हूं कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।"

हमले की फिर कोशिश कर सकते हैं आतंकवादी :

विशेषज्ञों के मुताबिक क्रिसमस के दिन अमेरिकी विमान में विस्फोट की कोशिश नए विस्फोटक की क्षमता का परीक्षण करने का प्रयास हो सकता है। इसके आधार पर आतंकवादी संगठनों के और हमलों की योजना बनाने की आशंका है।

अमेरिका के एक थिंक टैंक ने कहा कि नाइजीरिया के युवक उमर फारुक अब्दुल मुतल्लिब के नार्थवेस्ट एयरलाइंस की डेट्रॉयट जा रही उड़ान में विस्फोट का प्रयास यह साबित करता है कि अरब प्रायद्वीप में अलकायदा परिष्कृत विस्फोटक तैयार करने में सक्षम है।

स्वयं को वैश्विक खुफिया कंपनी बताने वाले स्ट्रेटफोर ने कहा है कि विस्फोटक के विफल होने का अर्थ है कि इसके निर्माता एक नई डिजाइन पर काम कर रहे हैं और अमेरिका को निशाना बनाने का प्रयास जारी रखेंगे। संस्था ने मंगलवार को कहा कि इसका मतलब है कि सुरक्षा उपायों को आत्मघाती हमलावरों की तलाश पर केंद्रित करना चाहिए न कि विस्फोटकों पर।

अलकायदा की गतिविधियों की समीक्षा :

क्रिसमस के दिन अमेरिकी विमान में विस्फोट के विफल प्रयास के मद्देनजर अमेरिका और यमन ने अलकायदा के यमन में संभावित ठिकानों की समीक्षा की है। अमेरिका की विशेष सेनाएं और खुफिया एजेंसियां यमन के सहयोगियों के साथ यमन में अलकायदा के संभावित ठिकानों की पहचान कर रही हैं।

समाचार चैनल सीएनएन ने दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा के एक जवाबी हमले का आदेश देने की स्थिति में व्हाइट हाउस इस विकल्प को तैयार कर रहा है। यह देखने का प्रयास किया जा रहा है कि इन ठिकानों का सीधा संबंध विमान कांड और उसके षड्यंत्र से है या नहीं।

यमन में पूर्व में हुए हवाई हमलों के बारे में अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा लेकिन चैनल के अनुसार अधिकारी निजी तौर पर यह कह रहे हैं कि यमन की सेना अकेले ऐसे हमले नहीं कर सकती।

दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार अमेरिका और यमन मिलकर काम करेंगे लेकिन अमेरिका उपलब्ध कराए गए हथियारों और खुफिया सूचनाओं के बारे में सार्वजनिक रूप से चुप रहेगा।

समझौते के अनुसार अमेरिका यमन सरकार की सहमति से क्रूज मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और चालक रहित विमानों (ड्रॉन) से हमले कर सकता है। अमेरिका को विश्वास है कि यमन में अलकायदा के कुछ महत्वपूर्ण नेताओं के साथ ही सैकड़ों आतंकवादी सक्रिय हैं। वहां कुछ आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर भी चल रहे हैं।

गुआंटानामो के पूर्व कैदी डेट्रॉयट विमान कांड के षड्यंत्रकर्ता :

गुआंटानामो जेल में बंद रह चुके दो व्यक्तियों को क्रिसमस वाले दिन एक अमेरिकी विमान को उड़ाने के विफल प्रयास का प्रमुख षड्यंत्रकर्ता माना जा रहा है। टेलीविजन नेटवर्क एबीसी ने मंगलवार को एक अमेरिकी अधिकारी और सुरक्षा विभाग के दस्तावेजों के आधार पर यह खबर दी।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार गुआंटानामो जेल में बंद मुहम्मद अतीक अल-हार्बी और सैद अली शैरी को नवंबर 2007 में सऊदी अरब भेजा गया था और बाद में उनको रिहा कर दिया गया। उन्हें यमन के उन चार संदिग्ध आतंकवादियों में शामिल माना जा रहा है जिन्होंने गत शुक्रवार को विमान को उड़ाने की साजिश रची। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अल-हार्बी ने बाद में अपना नाम बदलकर मुहम्मद अल-अवफी कर दिया।

अमेरिकी अधिकारी ने एबीसी को बताया कि अल-अवफी और शारी सऊदी अरब के नागरिक हैं और रिहा होने के बाद से दोनों यमन में अलकायदा के शीर्ष नेतृत्व में शामिल हो गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुआंटानामो जेल को बंद करने का वादा किया है लेकिन अधिकारियों के अनुसार 22 जनवरी की तय समय सीमा तक जेल को बंद नहीं किया जा सकता। गुआंटानामो में बचे 200 कैदियों में से करीब आधे यमन के हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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