कार्रवाई हुई तो होगी खून की होली: नक्सली

पश्चिम बंगाल के अज्ञात स्थान से फोन पर दिए साक्षात्कार में 52 वर्षीय किशनजी ने कहा, "गृह मंत्री पी.चिदंबरम झूठे हैं। एक बार वह कहते हैं कि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई मीडिया की कल्पना मात्र है और उसी समय वह झारखण्ड और छत्तीसगढ़ में और अधिक सैनिक भेजते हैं। मैं समझ सकता हूं कि मार्च में एक बड़ी कार्रवाई होने वाली है। "
किशनजी ने कहा, "यदि सुरक्षा बल कार्रवाई शुरू करते हैं तो मैं आपसे वादा करता हूं कि वर्ष 2010 में रक्तपात होगा। ऐसे समय में लोगों को हिंसा से राहत नहीं मिल सकेगी।"
झारखंड सबसे ज्यादा प्रभावित
गौरतलब है कि इस वर्ष 15 नवंबर तक नक्सली हिंसा में 770 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिसमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। नक्सलियों ने सबसे अधिक उपद्रव झारखण्ड में मचाया है।
किशनजी पश्चिम बंगाल के लालगढ़ इलाके से नक्सली कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य है। माना जाता है कि हाल ही में लालगढ़ में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ताओं की हत्या के पीछे किशनजी का ही हाथ है।
मूल रूप से आंध्र प्रदेश का निवासी किशनजी ने कहा कि यदि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई होती है तो उसका माकूल जवाब दिया जाएगा। उसने कहा, "अपने लोगों के खिलाफ युद्ध की बात करना पाखंड है।" वह उड़ीसा, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में राज्य सरकारों के खिलाफ युद्ध शुरू करना चाहता है।
तेलंगाना आंदोलन से जुड़े थे किशनजी
किशनजी आरंभ में पृथक तेलंगाना आंदोलन के साथ जुड़ा था, जिसके बाद ही वह भाकपा (माओवादी) का पूर्णकालिक सदस्य बन गया। पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारी अतींद्रनाथ दत्ता के अपहरण मामले में भी किशनजी का हाथ बताया जाता है। किशनजी अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में समान पकड़ रखता है। उसने कहा, "हमने कुछ घटनाओं से सीख ली है। हमने अब रणनीति बदल ली है और अब हम पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएंगे।"
उल्लेखनीय है कि गत कुछ महीने में पुलिस और सुरक्षा बलों ने कई नक्सली नेताओं को गिरफ्तार किया है, जिसमें कोबद गांधी, छत्रधर महतो, रवि शर्मा और बी.अनुराधा शामिल है। किशनजी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें सिंह ने कहा था कि जनजातियों तक आर्थिक विकास का लाभ नहीं पहुंच रहा है और प्रशासन को इसके लिए काम करना चाहिए।
सिंह के इस बयान पर किशनजी ने कहा, "क्या वह जमीनी हकीकत के बारे में जानते हैं? राज्य सरकारें विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए समझौते कर रही हैं। जनजातियों की कीमत पर वे लौह अयस्क कारखाने स्थापित कर रहे हैं। ऐसे में मानवीय पहलू कहां गए? ये सभी बनावटी हैं।"
बातचीत की आशा
नक्सली नेता का कहना है कि उसे अभी भी आशा है कि सरकार नक्सलियों के साथ बातचीत करेगी। उसने कहा, "हम बात कर सकते हैं यदि युद्धविराम और सुरक्षाकर्मियों की वापसी की घोषणा की जाती है। लेकिन ऐसा हकीकतन होना चाहिए। अन्यथा इसका कोई मतलब नहीं है।"
किशनजी ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, जिसमें कहा जाता है कि नक्सलियों का एक धड़ा उनके द्वारा शुरू किए गए 'हत्याओं के सिलसिले' को अस्वीकार करता है। उसने कहा, "यदि यह सच्चाई होती तो मैं यहां नहीं होता। मेरा काम करने का तरीका पारदर्शी है और इसे कोई भी देख सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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