महाविनाश संबंधी भविष्यवाणियों पर चर्चा करती किताब(पुस्तक समीक्षा फोटो सहित)
नई दिल्ली, 29 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्राचीन काल से ही पृथ्वी के विनाश को लेकर तरह-तरह की भविष्याणियां की जाती रही है। हाल ही वैज्ञानिकों ने कहा था कि हमारी पृथ्वी एक ऐसे धूमकेतु की ओर तेजी से बढ़ रही है, जिसकी टक्कर पृथ्वी के समस्त प्राणियों और पेड़-पौधे को खत्म कर देगी।
'डायमंड बुक्स' प्रकाशन की पुस्तक '2012 महाविनाश या नये युग का आरंभ' में पृथ्वी के विनाश को लेकर अब तक की गई ऐसी ही अनेक भविष्याणियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। पुस्तक के लेखक अशोक कुमार शर्मा पृथ्वी के विनाश संबंधी कई सवालों का जवाब देने का प्रयास किया हैं।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों हर कोई माया कैलेंडर के उस महान चक्र के संदर्भ बारे में यह जानने को उत्सुक है कि 21 दिसम्बर 2012 या उसके बाद क्या होगा? इसी विषय पर हॉलीवुड ने '2012' नाम से फिल्म भी बनाई है। पुस्तक में बताया गया है कि '2012' उस काल्पनिक समय की कहानी है, जिसमें सूर्य से निकली तेज भभक के कारण वैश्विक विनाश होगा।
पुस्तक में माया कैलेंडर और माया ज्योतिष के बारे में विस्तार से बताया गया है। लेखक का कहना है कि इस ज्योतिष विधा का जन्म अमेरिका में कम से कम छठी शताब्दी ई.पू. में हुआ था।
ज्योतिष ज्ञान के आधार पर प्राचीन काल से ही पृथ्वी के विनाश को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। पुस्तक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि सारे देशों के ज्योतिषों का एक प्रिय विषय 'विश्व का आसन्न अंत' रहा है। अभी तक 1,186 बार ऐसी भविष्यवाणियां की गई हैं, जिसमें विश्व में प्रलय की बात कही गई।
पुस्तक में पाठकों की जिज्ञासाओं को शांत करने की भरसक कोशिश की गई है। लेखक भविष्यवाणी करने के तरीके के बारे में बताते हुए कहते हैं, "यद्यपि इस कला को मूलत: बेबीलोन में विकसित किया गया था। इसमें तीन काल खंड रहे हैं। यूनानी ज्योतिषविद् क्लॉडियस टोलोमी ने व्यावहारिक ज्योतिष पर एक संपूर्ण ग्रंथ टेट्राबिबलोस नाम से लिखा था।"
पुस्तक में बताया गया है कि व्यावहारिक ज्योतिष के दो मुख्य उदेश्य हैं- "एक पीछे मुड़कर इतिहास की घटनाओं को स्पष्ट करना तथा घटनाओं के क्रम में एक पैटर्न ढूंढना जो साम्रज्यों के उत्थान और पतन सदृश्य अचानक घटित होने वाली घटनाओं को स्पष्ट कर सके। दूसरा है भविष्य का पूर्वानुमान।"
कुछ दाशर्निकों का मानना है कि विश्व को विनाश से बचाया जा सकता है यदि पूर्वानुमान सही रूप में उपलब्ध हो तथा उसके प्रतिकार के लिए समुचित प्रयास किया जाए। इन्ही मुद्दों को लेकर पुस्तक में विषयवार जानकारी दी गई है। विश्व के अलग-अलग हिस्सों में किस प्रकार ज्योतिषविद् पृथ्वी के विनाश के बारे में अपनी राय रखते आए हैं और इसके पीछे वैज्ञानिक आधार क्या है, इस बारे में भी पुस्तक में बताया गया है।
पुस्तक में रोचक तरीके से बताया गया है कि आखिर लोग भविष्याणियां कैसे करते हैं। लेखक का कहना है कि भविष्यवाणी के तरीके का कोई वैज्ञानिक आधार है या नहीं इस पर हमेशा बहस होती रही है और होती भी रहेगी।
पुस्तक में महाविनाश के विभिन्न वृतांत, रहस्योद्घाटक भविष्यवाणियां, प्रलय संबंधी तात्कालिक मान्यताएं जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया है। कहीं-कहीं पाठक को पुस्तक एक विज्ञान फंतासी भी लग सकती है लेकिन इस दौरान भी इससे हम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
पुस्तक की सबसे बड़ी खासियत संदर्भ ग्रंथ सूची है, जिसमें 'ऑन लाइन रिसोर्सेज' को भी शामिल किया गया है। लेखक उन वेबसाइटों के बारे में भी जानकारी देते हैं, जहां पृथ्वी के विनाश के बारे में रिपोर्ट पेश की गई है। इस खंड में विज्ञान से संबंधित विभन्न तथ्यों को पुस्तक में समेटा गया है और उन वेबसाइटों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
पुस्तक में रोचकता बनाए रखने के लिए फिल्म '2012' से संबंधित कुछ तस्वीरों को भी शामिल किया गया है, जिस वजह से ही इसमें विज्ञान फंतासी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
उल्लेखनीय है कि भविष्याणी करना, फिर सर्वनाश की अपेक्षा रखते हुए भयभीत होना हमारी विरासत का एक हिस्सा बन गया है। दरअसल ये किसी भी सभ्यता के लिए नया नहीं है। प्रत्येक कुछ वर्षो में सर्वनाश की भविष्यवाणी करने वाले अपने भयानक दावों के साथ उमड़ आते हैं। इनमें से अधिकतर के दावे मिलते-जुलते भी होते हैं। ऐसी भविष्यवाणियां लगातार मानव जाति को चेतावनी देते रहते हैं कि कभी भी महाविनाश हो सकता है।
(पुस्तक- 'महाविनाश या नये युग का आरंभ', प्रकाशक- डायमंड बुक्स, लेखक- अशोक कुमार शर्मा)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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