'ताज और ओबराय ने पूर्व की चेतावनी को नजअंदाज किया'
नई दिल्ली, 28 दिसम्बर (आईएएनएस)। वर्ष 2008 के मुंबई हमलों की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति का कहना है कि ताजमहल और ओबराय होटलों ने सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 26/11 से पूर्व दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।
मुंबई हमलों की जांच के लिए गठित आर. डी. प्रधान समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजमहल और ओबराय होटल के बाहर सुरक्षा संबंधी चेतावनी दिए जाने के बावजूद पुलिसकर्मियों की उपस्थिति काफी कम थी, जिस वजह से सशस्त्र पाकिस्तानी आतंकवादी होटल में प्रवेश कर सके।
26/11 हमले के दौरान ताज, ओबराय और लियोपोल्ड कैफे में आतंकवादियों ने सबसे अधिक उपद्रव मचाया था। प्रधान समिति का कहना है कि इन होटलों को पहले से चेतावनी दी गई थी कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा यहां हमला करने की साजिश रच रहा है।
समिति ने जांच के दौरान पाया कि विभिन्न खुफिया रिपोर्टों में इन तीनों स्थानों के बारे में विशेष रूप से उल्लेख किया गया था लेकिन होटल प्रबंधनों ने चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया।
आईएएनएस के पास प्रधान समिति की 90 पृष्ठों वाली जांच रिपोर्ट की एक प्रति है, जिसे पूर्व गृह सचिव आर.डी. प्रधान और पूर्व नौकरशाह वी.बालचंद्रन ने तैयार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ताज और ओबराय होटलों के प्रबंधनों ने सुरक्षा सबंधी सुझावों को नजरअंदाज किया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ताज होटल के समीप पुलिस चौकी को 26 नवंबर 2008 से 43 दिन पहले हटा दिया गया था। कोलाबा पुलिस स्टेशन के प्रभारी ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए बिना पुलिस चौकी को हटा दिया था। यहां तक कि जब हमला हुआ उस वक्त वहां मोबाइल पुलिस भी नहीं थी।
रिपोर्ट में कहा गया है, "26/11 के दिन जब दो आतंकवादी ताज के लॉबी में दाखिल हुए, उस समय वहां पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे।"
खुफिया ब्यूरो ने 24 सितंबर 2008 को चेतावनी जारी की थी कि लश्कर ताजमहल होटल को अपना निशाना बना सकता है। इससे पहले नौ अगस्त 2008 को भी चेतावनी दी गई थी कि ताजमहल और ओबराय होटलों पर बम हमला हो सकता है। चेतावनी में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के बारे में भी उल्लेख किया गया था।
पूर्व में 26 जून 2008 को लियोपोल्ड कैफे पर भी संभावित हमले की चेतावनी जारी की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने इन तीनों स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच भी की थी और अन्य होटलों को संभावित हमलों की चेतावनी दी थी।
पुलिस ने ताज होटल प्रबंधन से कहा था कि वे नार्थकोट गेट से प्रवेश रास्ते को बंद कर दे लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बाद में इसी गेट से दो आतंकवादी होटल में दाखिल हुए थे। पुलिस दल ने होटल के प्रबंधक करमबीर कंग से मुलाकात भी की थी लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा संबंधी तमाम उपायों को नजरअंदाज किया गया।
खुफिया ब्यूरो ने यहूदी केंद्र पर संभावित हमले की तीन चेतावनी दी थी लेकिन इसमें नरीमन हाउस का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी को यह जानकारी नहीं थी कि नरीमन हाउस में यहूदी संप्रदाय के लोग रहते हैं। यहां तक पुलिस और स्थानीय इजरायली महावाणिज्य दूतावास को भी जानकारी नहीं थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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