ईश्वर को पत्र लिखकर भी मनोकामना पूरी करते हैं भक्त
कैपादर (उड़ीसा), 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। यूं तो ईश्वर की आराधना के कई माध्यम हैं। कुछ लोग शांति के साथ प्रार्थना करते हैं तो कुछ मंत्रोच्चार के साथ अथवा भजन गाकर। लेकिन उड़ीसा के खुर्दा जिले में एक मंदिर ऐसा भी है जहां लोग ईश्वर को पत्र लिखकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए आराधना करते हैं।
भुवनेश्वर से 50 किलोमीटर दूर गुंबदनुमा यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का भी प्रतीक है। गुंबद पर जहां अर्धचंद्राकार कृति है, वहीं चक्र भी बना हुआ है।
एक भक्त सरदून निशान ने कहा, "पत्र लिखने की परंपरा की शुरुआत कब हुइर्, इसकी जानकारी तो नहीं है लेकिन ऐसी मान्यता है कि पत्र लिखकर आप कोई इच्छा व्यक्त करते हैं, तो आपकी मनोकामना पूरी होगी। आपकी जो भी मनोकामना हो उसे लिख डालें और फिर उसे मंदिर की दीवार पर लगा दें।"
17वीं शताब्दी के बोखारी बाबा के मंदिर में प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचते हैं। इसे सत्य पीर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों संप्रदाय के लोग पहुंचते हैं।
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां का पुजारी मुसलमान है लेकिन दूध, घी और केले से बने 'भोग' को हिंदू तैयार करते हैं। इसी तरह पुष्पांजलि आदि की व्यवस्था भी हिंदू ही करते हैं।
धांदू महापात्र ने कहा कि हमारा परिवार पीढ़ियों से मंदिर में फूल पहुंचाता रहा है और अब मैं भी उसी परंपरा का निर्वाह कर रहा हूं।
यह स्थल सांप्रदायिक सद्भाव की जीती-जागती मिसाल है। यहां मुस्लिम श्रद्धालु चादर चढ़ाते हैं तो हिंदू श्रद्धालु पुष्प अर्पित करते हैं।
मंदिर के पुजारी सत्तार खान ने कहा कि यहां विभिन्न धर्मो के लोग आते हैं। वे यहां कागज के टुकड़े पर अपनी मनोकामना लिखते हैं और फिर उसे दीवार पर लगा देते हैं। जब उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वे दोबारा आते हैं और बोखारी बाबा को चादर अथवा फूल चढ़ाते हैं।
उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु यहां आने में असमर्थ होते हैं वे यहां पत्र भेज देते हैं और हम उसे दीवार पर लगा देते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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