रूचिका मामले में कानून मंत्री ने मांगी सॉलिसिटर जनरल की राय (राउंडअप)

मोइली ने दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा में कहा, "इस मामले को जिस तरीके से निपटाया गया वह गलत है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "इस मामले पर मैंने सॉलिसिटर जनरल से चर्चा की है। मैंने उनसे पूछा है कि अदालत का फैसला आ जाने के बाद इस मामले में क्या किया जा सकता है। मैंने उनसे इस मामले पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से भी चर्चा करने को कहा है।"

मोइली ने यह स्वीकार किया कि रुचिका मामले में न्याय मिलने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार के मामलों पर दोबारा गौर किए जाने की आवश्यकता है।

इधर, मामले के मीडिया में उछने के बाद शुक्रवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को कटघरे में खड़ा करने प्रयास किया तो कांग्रेस ने भी बिना विलंब किए हुए पलटवार किया।

इंडियन नेशनल लोक दल के नेता चौटाला ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान इस मामले के दोषी एस.पी.सी. राठौर को बचाया नहीं गया बल्कि उसे निलंबित किया गया था।

चौटाला ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, "मेरी सरकार के दौरान राठौर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इससे पहले, जब इस मामले की शिकायत आई तो तत्काल प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले में हम संतुष्ट नहीं थे और तभी उसकी विभागीय जांच का आदेश दिया गया था।"

उन्होंने कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल और भजनलाल की सरकारों के कार्यकाल के दौरान राठौर को पदोन्नति दी गई थी। बंसीलाल के कार्यकाल के दौरान राठौर को पुलिस महानिदेशक बनाया गया था।"

चौटाला के इन दावों पर रुचिका की मित्र और मामले की प्रमुख गवाह अनुराधा के पिता आनंद प्रकाश ने आईएएनएस से कहा, "वह सिर्फ कांग्रेस को दोषी नहीं ठहरा सकते। किसी भी सरकार के दौरान राठौर को नहीं निलंबित किया गया। उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। आप रिकार्ड देख सकते हैं।"

चौटाला के आरोपों पर कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "हरियाणा में कांग्रेस की सरकार है। इस मामले में अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी और जल्द की जाएगी।"

पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल ने भी चौटाला के उन आरोपों का खंडन किया है।

भजनलाल ने समाचार चैनलों को कहा, "चौटाला ने उन्हें डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) बनाया था। उनके आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। वह (चौटाला) गलत हैं।"

भजनलाल के बेटे और हरियाणा जनहित कांग्रेस के नेता कुलदीप बिश्नोई ने भी चौटाला के आरोपों का खंडन किया है।

बिश्नोई ने कहा, "12 अगस्त 1990 को यह घटना हुई थी और 1990 व 1991 के दौरान परिवार को परेशान किया गया था। उस समय चौटाला सरकार का शासन था। मेरे पिता (भजन लाल) की सरकार बाद में आई थी।"

बिश्नोई ने कहा, "चौटाला और राठौर एक ही थे। हमने मामले को दोबारा शुरू करने व रुचिका के भाई के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने वाले और परिवार के अन्य सदस्यों को परेशान करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक मामला दर्ज करने की मांग की है।"

रूचिका के पिता ने एस. सी. गिरहोत्रा ने गुरुवार को कहा था कि चौटाला और हरियाणा सरकार के तंत्र ने उनकी बेटी को आत्महत्या करने और परिवार को भूमिगत होने के लिए मजबूर किया था।

गौरतलब है कि 12 अगस्त, 1990 को हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक राठोर ने 14 वर्षीय रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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