रुचिका दुर्व्यवहार मामले से जुड़े कुछ घटनाक्रम
-12 अगस्त 1990: हरियाणा के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) एस.पी.एस. राठौर ने 14 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिरहोत्रा के साथ अपने कार्यालय में दुर्व्यवहार किया। राठौर हरियाणा टेनिस संघ के अध्यक्ष भी था।
-16 अगस्त 1990: मुख्यमंत्री हूकुम सिंह और गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई गई।
-17 अगस्त 1990: हूकुम सिंह ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर.आर.सिंह को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
-18 अगस्त 1990: पुलिस ने राठौर के खिलाफ मामला दर्ज किया।
-3 सितंबर 1990: पुलिस महानिदेशक आर.आर.सिंह ने जांच के दौरान राठौर को प्रथम दृष्टया दोषी पाया और उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। बाद में नए पुलिस महानिदेश आर.के.हुड्डा और गृह सचिव जे.के.दुग्गल ने राठौर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने और आरोपपत्र दायर करने की संस्तुति की।
-28 मई 1991 : राष्ट्रपति शासन के दौरान राठौर के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने की अनुमति मिली।
-6 अप्रैल 1992: रुचिका गिरहोत्रा के भाई आशू के खिलाफ कार चोरी का मामला दर्ज किया गया।
-23 अक्टूबर 1993: आशू को अवैध रूप से हरियाणा पुलिस ने पकड़कर दो महीने तक हिरासत में रखा। आशू के खिलाफ कार चोरी के 11 मामले दर्ज किए गए।
-28 दिसम्बर 1993: रुचिका गिरहोत्रा ने अपने और परिवार पर बढ़ रहे उत्पीड़न के मामलों से परेशान होकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
-29 दिसंबर 1993 : रुचिका के आत्महत्या के एक दिन बाद पुलिस ने आशू को छोड़ दिया।
-अप्रैल 1994: राठौर के खिलाफ लगाए गए आरोप को भजन लाल की नेतृत्व वाली सरकार ने हटा दिया।
-4 नवंबर 1994: राठौर को भजन लाल सरकार ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया।
-16 नंवबर 2000: सीबीआई ने राठौर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
-5 दिसंबर 2000: राठौर को हरियाणा पुलिस महानिदेशक के पद से हटाकर छुटटी पर भेजा गया।
-मार्च 2002: राठौर अपनी पुलिस सेवा से रिटायर हो गए।
-21 दिसंबर 2009: सीबीआई की विशेष अदालत ने रुचिका गिरहोत्रा दुर्व्यवहार मामले में राठौर को दोषी करार दिया। अदालत ने राठौर को छह महीने जेल की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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