लोगों ने की रुचिका के लिए न्याय की मांग (राउंडअप)
उधर, चंडीगढ़ में रुचिका के लिए न्याय की मांग करते हुए लोग राठौर के घर के बाहर इकट्ठा हो गए। प्रदर्शनकारियों को देखते हुए राठौर के घर के बाहर पुलिस बल को तैनात कर दिया गया।
लोगों ने कहा कि रुचिका के साथ छेड़खानी कर उसे आत्महत्या करने पर मजबूर करने वाले राठौर को दी गई सजा काफी कम है।
दिल्ली में रुचिका की दोस्त अनुराधा ने कहा, "मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि हमें देश में हर लड़की को सुरक्षित बनाना होगा। मैं सोचती हूं कि हमारी राजनीतिक और न्यायायिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। रुचिका मामले में आए फैसले से इस चीज की जरूरत महसूस की जा रही है।"
एक गैर सरकारी संस्था-गुड गवर्नेस के कार्यकर्ता कनन जायसवाल ने कहा, "यह साफ हो गया है कि रुचिका को हरियाणा पुलिस ने धमकाया था। छेड़छाड़ की उस घटना के बाद भी रुचिका को कई तरह की मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ा था। हम इस मामले की फिर से सुनवाई की मांग करते हैं।"
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने सोमवार को चंडीगढ़ में सुनवाई के दौरान राठौर को 14 साल की रुचिका के साथ छेड़छाड़ का दोषी पाया था और उनके खिलाफ छह महीने की सजा और एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी।
यह सनसनीखेज मामला 19 पुराना है। राठौर ने 12, अगस्त 1990 को पंचकूला में रूचिका के साथ छेड़छाड़ की थी। इसके तीन वर्ष बाद रुचिका ने हरियाणा पुलिस की यातनाओं से तंग आकर 1993 में आत्महत्या कर ली थी।
रुचिका मामले की सुनवाई को लेकर प्रदर्शन में शामिल एक पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी कमल कांत जायसवाल ने इस बात की जांच की मांग की कि एक बच्ची के साथ शारीरिक छेड़छाड़ करने का आरोप लगे होने के बावजूद आखिरकार राठौर को हरियाणा का पुलिस महानिदेशक किस आधार पर बनाया गया।
दिल्ली की कई अन्य गैर सरकारी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने पत्र लिखकर कानून मंत्री एम. विरप्पा मोइली से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। इसी सिलसिले में लोगों ने जंतर-मंतर पर गुरुवार को मोमबत्तियां जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
इस बीच, दुर्व्यवहार की शिकार बनी किशोरी रुचिका गिरहोत्रा के पिता एस. सी. गिरहोत्रा ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और पूरे हरियाणा प्रशासन पर अपनी बेटी को प्रताड़ना के बाद आत्महत्या के लिए और पूरे परिवार को भूमिगत रहने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।
पिछले 19 वर्षो में पहली बार मीडिया के सामने आए गिरहोत्रा ने कहा कि उनका परिवार अब भी हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एस. पी. एस. राठौर और इस शीर्ष पुलिस अधिकारी की मदद करने वाली प्रणाली से खौफजदा है।
रुचिका की मित्र आराधना के अभिभावकों- आनंद और मधु प्रकाश- के निवास पर गिरहोत्रा ने पत्रकारों से कहा, "हम परिवार के लिए सुरक्षा चाहते हैं। यदि हमें अब भी भयभीत किया जाता है तो हम सरकार से सुरक्षा देने के लिए कहेंगे।"
चण्डीगढ़ से 10 किलोमीटर दूर हरियाणा के इस शहर-पंचकुला- में 12 अगस्त, 1990 को हुई दुर्व्यवहार की घटना के बाद से ही आनंद और मधु प्रकाश यह मुकदमा लड़ रहे हैं।
गिरहोत्रा ने कहा, "चौटाला उनका साथ देने वाले मुख्य व्यक्ति थे। राठौर उन्हें (चौटाला को) उनके सभी गलत कामों से बाहर निकाल लेते थे। यहां तक कि आर. आर. सिंह (1990 में हरियाणा के डीजीपी) द्वारा अपनी रिपोर्ट में राठौर के खिलाफ मामला दर्ज करने का सुझाव देने के बाद भी सरकार ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।"
एक बैंक के सेवानिवृत्त प्रबंधक गिरहोत्रा अपनी बेटी के साथ हुए दुर्व्यवहार की घटना और इसकी वजह से उनके परिवार को जिस दौर से गुजरना पड़ा उसे याद करते हुए रो पड़े।
केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक विशेष अदालत ने सोमवार को राठौर को दोषी ठहराते हुए उन्हें छह महीने की कैद व 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। उन्हें अदालत से तुरंत जमानत भी मिल गई थी।
गिरहोत्रा कहते हैं कि वह और उनका परिवार राठौर को केवल छह महीने की कैद की सजा मिलने से बहुत आहत हैं।
उन्होंने कहा, "मेरी बेटी के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उसे प्रताड़ित किया गया और उसे मरने के लिए मजबूर किया गया था। मेरे बेटे आशु को परेशान किया गया और उसे झूठे मामलों में फंसाया गया। विभिन्न अदालतों ने इन सभी मामलों को रद्द कर दिया था। हमें हर स्तर पर परेशान किया गया। पंचकुला छोड़ने के बाद शिमला और अन्य जगहों पर हम जहां भी गए राठौर ने हमारा पीछा किया। "
राठौर को उनके अपराध के अनुरूप ही सजा देने की मांग कर रहे गिरहोत्रा ने कहा कि यह बहुत आवश्यक है ताकि इस देश के बच्चे सुरक्षित हो सकें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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